बच्चों की शैक्षिक जरूरतों को समय रहते पहचानकर उन्हें उचित सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। ‘प्रशस्त 2.0’ के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग शुरू करने से पहले शिक्षकों को सेंसेटाइज किया जा रहा है। इसके लिए प्रशस्त एप और पोर्टल पर करीब 40 मिनट के कुल 10 सेंसेटाइजेशन वीडियो उपलब्ध कराए गए हैं।
इन वीडियो के माध्यम से शिक्षकों को बच्चों की स्क्रीनिंग की प्रक्रिया, उसकी आवश्यकता और बच्चों की शैक्षिक जरूरतों को समझने से जुड़ी आवश्यक जानकारी दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि स्क्रीनिंग केवल एक औपचारिक प्रक्रिया न रहकर बच्चों की वास्तविक जरूरतों की पहचान का प्रभावी माध्यम बने।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा के निर्देशों के क्रम में सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों, बेसिक शिक्षा अधिकारियों तथा संबंधित अधिकारियों को शिक्षकों को सेंसेटाइजेशन वीडियो देखने के लिए निर्देशित किया गया है। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि संबंधित सभी शिक्षक प्रशस्त एप/पोर्टल पर उपलब्ध सामग्री का अवलोकन कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑनबोर्ड हों।
स्क्रीनिंग से पहले तैयार होंगे शिक्षक
‘प्रशस्त 2.0’ के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग से पहले शिक्षकों को आवश्यक जानकारी और संवेदनशीलता प्रदान करने पर विशेष जोर दिया गया है। करीब 40 मिनट के 10 सेंसेटाइजेशन वीडियो के जरिए शिक्षकों को स्क्रीनिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है।
वीडियो का उद्देश्य शिक्षकों को इस बात के लिए तैयार करना है कि वे बच्चों की क्षमताओं और आवश्यकताओं को अधिक संवेदनशीलता के साथ समझ सकें। इससे स्क्रीनिंग प्रक्रिया के दौरान बच्चों की जरूरतों की पहचान अधिक व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से किए जाने की उम्मीद है।
सभी श्रेणी के स्कूलों के शिक्षक होंगे शामिल
इस पहल के दायरे में प्रदेश के परिषदीय, प्राइवेट एडेड और प्राइवेट अनएडेड विद्यालयों के शिक्षक शामिल हैं। सभी संबंधित शिक्षकों को प्रशस्त एप/पोर्टल से जोड़ा जा रहा है, ताकि स्क्रीनिंग प्रक्रिया से पहले उन्हें एक समान जानकारी और आवश्यक प्रशिक्षण मिल सके।
सरकार का मानना है कि समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए केवल बच्चों की स्क्रीनिंग पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षकों को भी स्क्रीनिंग की प्रक्रिया और उसके उद्देश्य की सही समझ होना जरूरी है।
तकनीक के जरिए प्रदेशभर में पहुंचेगी प्रशिक्षण सामग्री
शिक्षकों को सेंसेटाइजेशन वीडियो उपलब्ध कराने के लिए प्रशस्त एप और पोर्टल का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षकों तक प्रशिक्षण सामग्री पहुंचाना आसान हुआ है। शिक्षक अपनी सुविधा के अनुसार वीडियो देखकर स्क्रीनिंग प्रक्रिया के लिए खुद को तैयार कर सकते हैं।
तकनीक आधारित इस व्यवस्था से शिक्षकों के प्रशिक्षण और ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।
समावेशी शिक्षा को मिलेगा नया आधार
‘प्रशस्त 2.0’ में बच्चों की स्क्रीनिंग को शिक्षक की तैयारी के साथ जोड़कर देखा गया है। स्क्रीनिंग से पहले शिक्षकों को संवेदनशील बनाने से बच्चों की शैक्षिक जरूरतों की पहचान अधिक समझदारी और संवेदनशीलता के साथ किए जाने की संभावना है।
इस पहल से विद्यालय स्तर पर ऐसे बच्चों की पहचान करने और उनकी जरूरत के अनुसार शैक्षिक सहयोग तय करने में मदद मिलेगी। तकनीक और शिक्षक की संवेदनशीलता को साथ जोड़ते हुए योगी सरकार का यह प्रयास प्रदेश में जरूरत आधारित और समावेशी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


