केरल में आरजेडी की एंट्री, पीके प्रवीन की जीत क्यों है खास

shikha verma
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केरल विधानसभा चुनाव में इस बार एक दिलचस्प राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), जिसे अब तक मुख्य रूप से बिहार की राजनीति से जोड़ा जाता रहा है, ने पहली बार केरल विधानसभा में जीत दर्ज की है।

आरजेडी के उम्मीदवार पीके प्रवीन ने कन्नूर ज़िले की कुथुपरम्बा सीट से जीत हासिल कर पार्टी का खाता खोला। उन्होंने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की उम्मीदवार जयंती राजन को 1,286 वोटों से हराया। प्रवीन को कुल 70,448 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे।

कौन हैं पीके प्रवीन

पीके प्रवीन पेशे से एक कारोबारी हैं। उन्होंने अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन और एमफिल की पढ़ाई की है। चुनावी हलफ़नामे के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 3.3 करोड़ रुपये है, जिसमें चल और अचल दोनों संपत्तियाँ शामिल हैं। उन पर करीब 15 लाख रुपये की देनदारी है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

विश्लेषकों का मानना है कि उनकी साफ़ छवि और मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने मतदाताओं के बीच भरोसा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

केरल में आरजेडी की मौजूदगी

केरल में आरजेडी, वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) का सहयोगी दल है। इसी गठबंधन के तहत पार्टी ने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा, जिनमें से कुथुपरम्बा पर जीत मिली, जबकि दो सीटों पर वह दूसरे स्थान पर रही।

चुनाव प्रचार के दौरान आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी केरल में सक्रिय भूमिका निभाई थी और एलडीएफ के समर्थन में अभियान चलाया था।

क्यों अहम है यह जीत

केरल जैसे राज्य में आरजेडी की यह जीत प्रतीकात्मक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे पार्टी को बिहार से बाहर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दिखाने का मौका मिला है। खासतौर पर ऐसे समय में, जब हालिया बिहार चुनावों में पार्टी को झटका लगा था, यह जीत उसके लिए मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है। पीके प्रवीन की जीत न सिर्फ एक सीट की सफलता है, बल्कि आरजेडी के विस्तार की दिशा में एक अहम संकेत भी है।

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