फ़्रांस में आयोजित जी-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षित समुद्री मार्गों और नाविकों की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कई देशों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है और वैश्विक समुद्री व्यापार भी प्रभावित हुआ है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस संघर्ष में भारत के कुछ नागरिकों की जान गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समुद्री व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने देशों के बीच सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रधानमंत्री मोदी की यह टिप्पणी उस घटना के बाद आई है जिसमें 9 जून को ओमान तट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु हो गई थी। इस घटना को लेकर भारत ने अमेरिका के समक्ष अपना विरोध भी दर्ज कराया था।
जी-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से भी मुलाकात हुई। यह मुलाकात हाल के महीनों में दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की बैठक थी।
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद विपक्षी दलों ने आलोचना करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों की मौत का जिक्र करते समय अमेरिका का स्पष्ट रूप से नाम नहीं लिया गया। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसे लेकर सरकार पर सवाल उठाए और घटना पर अधिक स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि भारत ने आधिकारिक स्तर पर इस मुद्दे पर अमेरिका के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से बातचीत में भारतीय नाविकों की मौत पर चिंता और आपत्ति व्यक्त की थी। यह मुद्दा अब भारत-अमेरिका संबंधों और सरकार की विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।


