उत्तर प्रदेश के महराजगंज में प्राथमिक विद्यालय के विलय को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। सदर ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम सभा कोदइला के प्राथमिक विद्यालय को भिस्वा के प्राथमिक विद्यालय में मर्ज किए जाने के फैसले से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने स्कूल विलय के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए ‘स्कूल नहीं तो वोट नहीं’ के नारे लगाए।
बच्चों को पार करना पड़ता है NH-730
ग्रामीणों का कहना है कि कोदइला प्राथमिक विद्यालय का विलय ऐसे स्कूल में किया गया है, जहां पहुंचने के लिए छोटे बच्चों को व्यस्त NH-730 पार करना पड़ता है। अभिभावकों का आरोप है कि हाईवे पर लगातार वाहनों की आवाजाही के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा बना रहता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इसी वजह से कई अभिभावक अपने छोटे बच्चों को दूसरे विद्यालय भेजने को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि शिक्षा जरूरी है, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के लिए उनकी सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
विलय के मानकों का दिया हवाला
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने दावा किया कि 2 अगस्त 2025 को बेसिक शिक्षा मंत्री के हवाले से प्रकाशित खबर में स्कूलों के विलय से जुड़े कुछ मानकों का उल्लेख किया गया था। ग्रामीणों के अनुसार, ऐसे विद्यालयों के विलय पर पुनर्विचार की बात कही गई थी, जहां बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए हाईवे, तालाब या अन्य जोखिम भरे स्थानों से होकर गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कोदइला स्कूल के बच्चों को भी विद्यालय पहुंचने के लिए NH-730 पार करना पड़ रहा है। ऐसे में उनका सवाल है कि जब बच्चों की सुरक्षा को लेकर मानक तय किए गए हैं, तो इस विद्यालय के विलय के फैसले पर दोबारा विचार क्यों नहीं किया जा रहा है।
स्कूल वापस शुरू कराने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि कोदइला प्राथमिक विद्यालय को पहले की तरह दोबारा संचालित किया जाए, ताकि गांव के छोटे बच्चों को अपने ही गांव में सुरक्षित माहौल में शिक्षा मिल सके।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि विद्यालय का विलय वापस नहीं लिया गया तो उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। इसी दौरान ग्रामीणों ने बैनर लेकर ‘स्कूल नहीं तो वोट नहीं’ का नारा भी लगाया।


