इंदौर, जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है और जो लगातार स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष स्थान पर रहा है, इस समय भीषण जल संकट से जूझ रहा है। शहर की करीब 30 लाख आबादी के कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है, जिससे आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, तेज गर्मी और भूजल स्तर में गिरावट के कारण शहर के 4,000 से अधिक बोरिंग सूख चुके हैं। इसके चलते कई क्षेत्रों में नियमित जल आपूर्ति बाधित हो रही है। नगर निगम का दावा है कि नर्मदा नदी से जल आपूर्ति की व्यवस्था के जरिए और टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद कई वार्डों में स्थिति गंभीर बनी हुई है।
शहर के सुखलिया, नेहरू नगर, खजराना, पालदा, चंदन नगर और भागीरथपुरा जैसे क्षेत्रों में लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में तीन से चार दिन में एक बार पानी मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में नाराजगी बढ़ रही है।
जल संकट को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) दोनों के स्थानीय नेताओं ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया है कि पानी के टैंकरों के वितरण में भेदभाव हो रहा है, जबकि बीजेपी के कुछ पार्षद और विधायक भी अपने क्षेत्रों में पानी की कमी को लेकर असंतोष जता चुके हैं।
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि शहर में प्रतिदिन लगभग 250 लीटर प्रति व्यक्ति पानी की आपूर्ति की जा रही है और टैंकरों की संख्या भी बढ़ाई गई है। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि जमीनी स्तर पर स्थिति दावों के विपरीत है।
वहीं, महापौर ने स्वीकार किया है कि बढ़ती आबादी और नई कॉलोनियों के कारण जल प्रबंधन पर दबाव बढ़ा है। कलेक्टर ने भी आश्वासन दिया है कि स्थिति को सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल शहर में पानी संकट के समाधान को लेकर प्रशासन और जनता दोनों ही चिंतित हैं।


