संसद के मानसून सत्र के दौरान पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने पर बीजेपी और एनडीए के कई सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान उनके समर्थन में नारे लगाए गए और कई सांसदों ने उनसे मुलाकात कर उनका अभिवादन किया।
दूसरी ओर, विपक्षी सांसदों ने इस स्वागत का विरोध किया और इसे लेकर संसद परिसर में नारेबाज़ी की। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस स्वागत की आलोचना करते हुए कहा कि यह उन लाखों छात्रों की भावनाओं की अनदेखी है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से प्रभावित हुए। कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इसे छात्रों के प्रति असंवेदनशील बताया।
वहीं बीजेपी नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए। पार्टी नेताओं के अनुसार, उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया। उनका कहना है कि उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़ा दिया।
धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया था। उनका इस्तीफ़ा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े राजनीतिक विवादों के बाद आया। इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार की आलोचना कर रहा है, जबकि बीजेपी का कहना है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।
इस घटना ने संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस को और तेज़ कर दिया है। एक ओर विपक्ष इसे छात्रों के साथ अन्याय का प्रतीक बता रहा है, तो दूसरी ओर सत्तापक्ष धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल और योगदान को रेखांकित कर रहा है।


