उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं। इसी बीच सहारनपुर जिले की देवबंद विधानसभा सीट पर भी राजनीतिक दलों की तैयारियों और संभावित समीकरणों को लेकर चर्चा बढ़ गई है। बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच यहां मुख्य मुकाबला माना जाता है, लेकिन बहुजन समाज पार्टी का मजबूत वोट बैंक चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
देवबंद विधानसभा सीट संख्या 5 है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के बृजेश सिंह ने समाजवादी पार्टी के कार्तिकेय राणा को 7,104 वोटों के अंतर से हराया था। बसपा ने राजेंद्र सिंह चौधरी और कांग्रेस ने राहत खलील को मैदान में उतारा था।
2022 में BJP ने दर्ज की थी जीत
2022 के चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक देवबंद सीट पर बीजेपी को 93,890 वोट मिले थे, जबकि सपा के खाते में 86,786 वोट आए। बसपा को भी 52,732 वोट मिले थे।
वोट शेयर की बात करें तो बीजेपी को 38.77 फीसदी, सपा को 35.83 फीसदी और बसपा को 21.77 फीसदी वोट मिले। यानी बीजेपी और सपा के बीच वोट शेयर का अंतर करीब 2.93 फीसदी रहा।
इससे साफ है कि देवबंद में मुकाबला काफी करीबी रहा था और बसपा का वोट शेयर भी इतना मजबूत था कि वह नतीजों पर असर डाल सकता है।
2024 लोकसभा चुनाव में BJP की बढ़ी बढ़त
2024 के लोकसभा चुनाव में भी देवबंद विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी गठबंधन का प्रदर्शन मजबूत रहा।
- बीजेपी गठबंधन: 94,289 वोट
- सपा गठबंधन: 73,238 वोट
- बसपा: 48,243 वोट
इस चुनाव में बीजेपी गठबंधन करीब 21 हजार वोटों की बढ़त बनाने में सफल रहा। वहीं बसपा ने भी अपना आधार काफी हद तक बरकरार रखा।
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत का अंतर 7,104 वोट था, जबकि 2024 में यह अंतर काफी बढ़ गया। हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के मुद्दे व उम्मीदवार अलग होते हैं, इसलिए इन आंकड़ों को सीधे 2027 के नतीजों का संकेत नहीं माना जा सकता।
देवबंद में BSP की भूमिका अहम
देवबंद सीट पर बसपा लंबे समय से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत रही है। 2022 में पार्टी को 52 हजार से ज्यादा वोट मिले थे और 2024 में भी उसे 48 हजार से अधिक वोट मिले।
यही वजह है कि 2027 के चुनाव में अगर बीजेपी और सपा के बीच मुकाबला करीबी रहता है, तो बसपा का वोट शेयर नतीजे पर बड़ा असर डाल सकता है।
क्या है देवबंद का जातीय समीकरण?
देवबंद विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता सबसे बड़ी आबादी में बताए जाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यहां करीब 95 हजार मुस्लिम, 58 हजार एससी, 40 हजार सैनी, 35 हजार क्षत्रिय, 30 हजार कश्यप और 25 हजार गुर्जर मतदाता हैं।
इसके अलावा करीब 19 हजार त्यागी, 5-5 हजार ब्राह्मण और वैश्य तथा करीब 5 हजार जाट मतदाता बताए जाते हैं।
पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के विभिन्न समुदायों को एक साथ देखें तो इनका कुल प्रभाव भी काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। यही वजह है कि देवबंद में किसी भी पार्टी के लिए अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी होगा।
2027 में किसके पक्ष में जाएगा समीकरण?
देवबंद में बीजेपी को सामान्य वर्ग और ओबीसी के समर्थन से मजबूती मिलती रही है, जबकि सपा की नजर मुस्लिम और पिछड़े वर्ग के वोटों पर रहती है। दूसरी ओर बसपा का अपना मजबूत वोट बैंक है, जो मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की क्षमता रखता है।
2027 से पहले उम्मीदवारों के चयन, गठबंधन की स्थिति और स्थानीय मुद्दे इस सीट के समीकरण को काफी हद तक बदल सकते हैं। ऐसे में फिलहाल देवबंद को ऐसी सीट माना जा सकता है जहां BJP और SP के बीच सीधी टक्कर के साथ BSP भी गेमचेंजर की भूमिका निभा सकती है।


