हिमाचल प्रदेश में लगातार खराब मौसम, ठंड और ओलावृष्टि के चलते बागवानी और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है। कई इलाकों में फसलों और फलों की फ्लावरिंग प्रभावित होने से किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ गई है।
प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा है कि फिलहाल नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है और पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही राहत पैकेज पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बागवानी पर सबसे ज्यादा असर
मंत्री ने बताया कि मई महीने में भी शिमला सहित कई पहाड़ी इलाकों में असामान्य ठंड का असर देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर सेब और अन्य फलों की फसल पर पड़ रहा है। कई जगह ओलावृष्टि और मौसम की खराब स्थिति के कारण फसल उत्पादन प्रभावित हुआ है।
फसल बीमा को लेकर सरकार की अपील
जगत सिंह नेगी ने कहा कि राज्य सरकार सीमित संसाधनों के बावजूद आपदा के समय किसानों और बागवानों को सहायता देती रही है, लेकिन यह सहायता पर्याप्त नहीं होती।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि अधिक से अधिक किसानों को मौसम आधारित फसल बीमा योजना से जोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि हिमाचल में लगभग साढ़े तीन लाख बागवान हैं, लेकिन इनमें से 75 हजार से भी कम लोग ही फसल बीमा योजना का लाभ ले रहे हैं।
राहत राशि और आपदा प्रबंधन
राजस्व मंत्री ने यह भी कहा कि वर्ष 2023 और 2025 की प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राज्य सरकार ने केंद्र से मिलने वाली सहायता से अधिक राहत राशि प्रभावित लोगों को दी थी। हालांकि, हर बार इस स्तर की सहायता देना संभव नहीं होता।
चुनाव और प्रशासन पर बयान
स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि विकास ही मुख्य मुद्दा रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंचायत, नगर परिषद और जिला परिषद के अधिकार क्षेत्र अलग-अलग हैं और हर संस्था को अपने दायरे में ही कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई बार स्थानीय निकाय ऐसे वादे कर देते हैं जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर होते हैं, जिससे बाद में समस्याएं पैदा होती हैं।

