बिहार के भागलपुर में स्थित विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा टूटकर गंगा नदी में गिरने के बाद आसपास के इलाकों में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। यह पुल भागलपुर को कोसी और सीमांचल क्षेत्र से जोड़ने वाली सबसे अहम कड़ी माना जाता था। पुल टूटने के बाद हज़ारों लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी मुश्किलों में घिर गई है। अब लोगों को गंगा पार करने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे यात्रा लंबी, महंगी और जोखिम भरी हो गई है।
तीन और चार मई की दरमियानी रात पुल का एक स्लैब अचानक धंस गया और बाद में गंगा में गिर गया। प्रशासन ने तुरंत पुल पर आवाजाही बंद कर दी। इसके बाद भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, सुपौल और सहरसा जैसे कई ज़िलों का संपर्क बुरी तरह प्रभावित हो गया। बताया जा रहा है कि इस पुल से रोज़ करीब एक लाख लोग आवाजाही करते थे।
पुल टूटने से सबसे ज्यादा परेशानी नौकरीपेशा लोगों, छात्रों, मरीजों और छोटे कारोबारियों को हो रही है। लोगों को अब नावों के जरिए नदी पार करनी पड़ रही है। कई जगहों पर भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। मौसम खराब होने पर नाव से सफर और भी खतरनाक हो जाता है।
भागलपुर के बरारी घाट पर इन दिनों अफरा-तफरी जैसा माहौल बना हुआ है। प्रशासन ने नाव और फेरी सेवा शुरू की है, लेकिन लोगों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है। मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव आर्यन मिश्रा का कहना है कि लोग जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे हैं और सरकार को सुरक्षित जहाज़ों की संख्या बढ़ानी चाहिए।
इस हादसे का असर कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दूध, सब्ज़ी, फल और अन्य सामान लाने वाले व्यापारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। थोक बाजारों में ग्राहकों की संख्या घट गई है और व्यापार लगभग आधा रह गया है। कारोबारियों को डर है कि अगर जल्द पुल ठीक नहीं हुआ तो भागलपुर का व्यापार दूसरे शहरों में शिफ्ट हो सकता है।
छात्रों की पढ़ाई और मरीजों के इलाज पर भी असर पड़ा है। कई छात्र परीक्षा नहीं दे पाए, जबकि मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
सरकार ने पुल हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही राज्य के पुराने पुलों का सुरक्षा ऑडिट कराने का फैसला लिया गया है। प्रशासन का दावा है कि कुछ महीनों में स्थिति सामान्य कर दी जाएगी, लेकिन फिलहाल लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।


