लखनऊ में आयोजित ‘दुग्ध स्वर्ण महोत्सव-2026’ डेयरी सेक्टर के विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ। इस आयोजन में करीब ₹5000 करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी, जिससे राज्य के डेयरी उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
हजारों पशुपालकों और निवेशकों की भागीदारी
इस दो दिवसीय महोत्सव में हजारों पशुपालकों, उद्यमियों और निवेशकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में देश-विदेश से जुड़े प्रतिभागियों ने आधुनिक तकनीक, स्वदेशी नस्लों के पालन और डेयरी उत्पादों के विस्तार पर विचार साझा किए।
सरकार का लक्ष्य डेयरी सेक्टर को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बनाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान ‘नंद बाबा दुग्ध मिशन’ और ‘दुग्ध नीति-2022’ के तहत लाभार्थियों की सफलता की कहानियां साझा की गईं। अब तक हजारों किसानों को सरकारी योजनाओं से लाभ मिल चुका है और लाखों दुग्ध उत्पादकों को सहकारी समितियों से जोड़ा गया है।
25,000 करोड़ से अधिक के निवेश समझौते
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डेयरी क्षेत्र में अब तक ₹25,000 करोड़ से अधिक के निवेश समझौते (MoU) किए जा चुके हैं, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हुआ है। कई नई परियोजनाएं भी शुरू की गई हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावा दे रही हैं।
आधुनिक तकनीक और नवाचार पर फोकस
महोत्सव में निजी डेयरी कंपनियों ने अपने आधुनिक उत्पाद और तकनीक प्रदर्शित किए। विशेषज्ञों ने बताया कि बेहतर गुणवत्ता, पारदर्शी मूल्य व्यवस्था और तकनीकी नवाचार से डेयरी सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।
सरकार का विजन
योगी आदित्यनाथ सरकार का कहना है कि यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि डेयरी सेक्टर को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य किसानों को स्थायी आय और बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।

