होर्मुज़ संकट का असर दुनिया पर, लेकिन चीन क्यों है सुरक्षित?

Bole India
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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधा के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। ईरान की चेतावनियों के चलते तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।

इस संकट का असर एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा पड़ा है। फिलीपींस ने ईंधन बचाने के लिए चार दिन का वर्क वीक लागू किया है, जबकि इंडोनेशिया अपने सीमित भंडार को बचाने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता चीन इस संकट में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में नजर आ रहा है। इसकी वजह है उसकी लंबे समय से बनाई गई ऊर्जा रणनीति।

चीन क्यों है मजबूत स्थिति में?

1. ऊर्जा स्रोतों की विविधता
चीन सिर्फ मध्य पूर्व पर निर्भर नहीं है। वह रूस से पाइपलाइन के जरिए बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है, जो उसके कुल आयात का लगभग 20% है। इसके अलावा, देश का उत्तरी हिस्सा घरेलू उत्पादन से भी चलता है।

2. विशाल तेल भंडार
विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन ने करीब 90 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल स्टॉक कर रखा है, जो लगभग तीन महीने की जरूरतों को पूरा कर सकता है। कुछ अनुमान इसे 1.4 अरब बैरल तक बताते हैं।

3. कोयले पर मजबूत पकड़
चीन दुनिया का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक है और उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा कोयले से पूरा होता है। इससे तेल और गैस पर उसकी निर्भरता कम रहती है।

4. नवीकरणीय ऊर्जा में बढ़त
पिछले कुछ वर्षों में चीन ने सौर, पवन और जलविद्युत जैसे क्लीन एनर्जी स्रोतों में भारी निवेश किया है। 2024 तक देश की एक-तिहाई से ज्यादा बिजली इन्हीं स्रोतों से आने लगी थी।

5. इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग
चीन में बिकने वाली नई कारों में बड़ी हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की है, जिससे पेट्रोल-डीजल की मांग कम हुई है और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों का असर सीमित हुआ है।

फिर भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं

इसके बावजूद, चीन पूरी तरह संकट से अछूता नहीं है। तेल की बढ़ती कीमतें उसके पेट्रोकेमिकल उद्योग और परिवहन लागत को प्रभावित कर सकती हैं। हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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