क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता का निधन, लंबे समय से कैंसर से थे पीड़ित

Bole India
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ग्रेटर नोएडा | भारतीय क्रिकेटर Rinku Singh के पिता खंचंद सिंह का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। वह लंबे समय से स्टेज-4 लिवर कैंसर से पीड़ित थे और ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।

अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में उनकी हालत गंभीर हो गई थी। 21 फरवरी को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां तबीयत बिगड़ने पर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

पिता की बिगड़ती सेहत की जानकारी मिलते ही रिंकू सिंह ICC मेन्स टी20 वर्ल्ड कप कैंप छोड़कर मंगलवार शाम घर लौट आए थे।

क्या है स्टेज-4 लिवर कैंसर?
स्टेज-4 लिवर कैंसर कैंसर का सबसे उन्नत चरण होता है। इस अवस्था में कैंसर लिवर से बाहर निकलकर शरीर के अन्य अंगों जैसे फेफड़ों, हड्डियों या लिंफ नोड्स तक फैल चुका होता है। इस स्तर पर बीमारी का पूर्ण इलाज संभव नहीं माना जाता, लेकिन उपचार के जरिए इसे नियंत्रित करने और लक्षणों को कम करने की कोशिश की जाती है।

लिवर कैंसर के चार चरण:
स्टेज 1: कैंसर केवल लिवर तक सीमित।

स्टेज 2: ट्यूमर बड़ा होकर रक्त वाहिकाओं तक फैल सकता है।

स्टेज 3: कैंसर पास के लिंफ नोड्स या बड़ी नसों तक पहुंच जाता है।

स्टेज 4: कैंसर दूर के अंगों तक फैल जाता है।

प्रमुख लक्षण
पीलिया (आंखों और त्वचा का पीला पड़ना)

  1. तेजी से वजन घटना
  2. भूख में कमी
  3. लगातार थकान
  4. पेट में दर्द या सूजन
  5. सांस लेने में परेशानी
  6. हड्डियों में दर्द
  7. मानसिक स्थिति में बदलाव

इलाज और सर्वाइवल रेट
विशेषज्ञों के अनुसार, स्टेज-4 लिवर कैंसर में इलाज का मुख्य उद्देश्य बीमारी की रफ्तार को धीमा करना और मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाना होता है।

उपचार में कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) और ट्रांसआर्टेरियल कीमोएम्बोलाइजेशन (TACE) जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं। कुछ चुनिंदा मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट पर भी विचार किया जाता है।

आंकड़ों के अनुसार, यदि कैंसर दूर के अंगों तक फैल चुका है तो पांच साल तक जीवित रहने की संभावना लगभग 3% तक रह जाती है। हालांकि, हर मरीज की स्थिति अलग होती है और परिणाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं।

रिंकू सिंह के पिता के निधन से खेल जगत में शोक की लहर है। यह घटना एक बार फिर गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता और समय पर जांच की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

 

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