दिल्ली में ब्रिक्स समिट का आगाज, BRICS रिफॉर्म के लिए क्या है पीएम मोदी का रोडमैप?

Nikhil Malhotra
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उन्होंने कहा कि रिप्रेजेंटेशन में यूएनएससी में सुधार अब टाला नहीं जा सकता। टैक्स बेस्ड नेगोशिएशन से हमें इस जोड़ना होगा। वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, इको…

उन्होंने कहा कि रिप्रेजेंटेशन में यूएनएससी में सुधार अब टाला नहीं जा सकता। टैक्स बेस्ड नेगोशिएशन से हमें इस जोड़ना होगा। वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, इकोनॉमिक नीति आज की असलियत के आधार पर होनी चाहिए। जो देश ग्लोबल इकोनॉमिक को गति देते हैं उन्हें उचित भूमिका मिलनी चाहिए

पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान रेजिलियंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी भारत की प्राथमिकताएं रही हैं। कोशिश की गई कि ब्रिक्स सहयोग को केवल सरकारों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे आम लोगों से भी जोड़ा जाए। इसी उद्देश्य से 350 से ज्यादा बैठकों का आयोजन किया गया और करीब 30 शहरों में सदस्य देशों की टीमों का स्वागत किया गया

पीएम मोदी ने कहा कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि सदस्य देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और सहमति के आधार पर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा, हम सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। अब समय आ गया है कि ब्रिक्स में मौजूद हमारी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदला जाए

प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स को आने वाले दो दशकों के लिए महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करना होगा। इसकी शुरुआत संगठन के अपने कामकाज के तरीके में सुधार से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इसके कारण संगठन की संस्थागत प्रगति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए ऐसी मजबूत व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जिससे अध्यक्षता बदलने के बावजूद फैसलों और पहलों में निरंतरता बनी रहे

पीएम मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा ग्लोबल गवर्नेंस स्ट्रक्चर एक पिरामिड की तरह है, जिसमें सत्ता और फैसले लेने की ताकत शीर्ष पर कुछ देशों और संस्थाओं के हाथों में केंद्रित है। उन्होंने कहा कि पिरामिड के निचले हिस्से में वे देश हैं, जो इन फैसलों से सीधे प्रभावित होते हैं, लेकिन आकार या प्रभाव कम होने की वजह से निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी पर्याप्त भागीदारी नहीं हो पाती।

पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स को मजबूत करने के साथ-साथ ऐसी वैश्विक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम करना होगा, जिसमें सभी देशों की आवाज को उचित प्रतिनिधित्व मिले

स्रोत: readnownews.in

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