प्लेंचिया, बिलबाओ के पास समुद्र के किनारे बसा एक छोटा-सा कस्बा है। यहां लंबे समय से ईल मछली पकड़ना लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा है। लेकिन अब स्पेन…
प्लेंचिया, बिलबाओ के पास समुद्र के किनारे बसा एक छोटा-सा कस्बा है। यहां लंबे समय से ईल मछली पकड़ना लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा है। लेकिन अब स्पेन के बास्क इलाके में मछुआरे ईल नहीं पकड़ सकते। यह बेहद पसंद की जाने वाली एक मछली है और इसकी कीमत भी काफी ज्यादा होती है। अधिकारियों के मुताबिक, इसकी तस्करी दुनिया के सबसे ज्यादा मुनाफे वाले वन्यजीव तस्करी के कारोबारों में शामिल है
इस क्षेत्रीय प्रतिबंध का मकसद यूरोपीय ईल की रक्षा करना है, जो गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति है और विलुप्त होने की कगार पर है। 1980 के दशक से इसकी आबादी में लगभग 95 फीसदी की कमी आई है। हालांकि, स्थानीय मछुआरों का तर्क है कि ये नियम उन लोगों को सजा देते हैं जो इनका पालन करते हैं, जबकि अपराधी नेटवर्क गैर-कानूनी तरीके से पकड़ी गई ईल के अरबों यूरो के व्यापार से फायदा उठाते हैं
उनाई इजागुइरे 30 साल से ईल मछली पकड़ रहे हैं, लेकिन अब उनकी रोजी-रोटी खतरे में पड़ती नजर आ रही है। वह कहते हैं, “जब बाकी दुनिया में इस मछली को पकड़ने की इजाजत है, तो क्या सिर्फ बास्क के मछुआरों के जाल से ही ईल का वजूद मिट जाएगा? यह तो बेतुकी बात है।”
संरक्षणवादी प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से पैदा हुए कई खतरों के बीच इस प्रतिबंध को एक आपातकालीन उपाय के तौर पर समर्थन करते हैं। हालांकि, समुद्री जीवविज्ञानी एस्टिबालिज डियाज का कहना है कि लंबे समय के उपायों की भी जरूरत है। मसलन, पनबिजली बांधों को हटाना जो उनके प्रवास के रास्तों को रोकते हैं और अपने टरबाइन से ईल मछलियों को मार डालते हैं
स्थानीय समुद्री अनुसंधान संस्थान ‘एजेडटीआई’ के साथ काम करने वाली डियाज ने कहा, “हालात इतने खराब हैं कि हमें हर चीज को लेकर कदम उठाने होंगे।”
यूरोपियन ईल को जो चीज सबसे ज्यादा संकट में डालती है, वह है उनका अनोखा जीवन चक्र। यह हाल तक एक रहस्य बना हुआ था। वैज्ञानिक अब जानते हैं कि वयस्क ईल यूरोपीय नदियों से हजारों किलोमीटर की यात्रा करके उत्तरी अटलांटिक के सार्गासो सागर तक जाती हैं, जो प्रजनन के लिए उनकी एकमात्र जानी-पहचानी जगह है। वे वहां प्रजनन करती हैं और फिर मर जाती हैं। इसके बाद, उनके लार्वा बहकर यूरोप आ जाते हैं। जब तक वे नदियों तक पहुंचती हैं, वे छोटी और पारदर्शी ‘ग्लास ईल’ में बदल चुकी होती हैं
डियाज का कहना है कि आज बिस्के की खाड़ी और उससे जुड़े जलमार्गों तक पहुंचने वाली ग्लास ईल की संख्या 1980 के दशक से पहले की तुलना में सिर्फ 12 फीसदी ही रह गई है
संरक्षणवादी जिन छोटी ग्लास ईल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं वे अवैध व्यापार में सबसे कीमती हैं। इनकी कीमत 9,000 यूरो (लगभग 10,400 डॉलर) प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है। इजागुइरे ने बताया, “आप इसकी तुलना ड्रग्स की तस्करी से कर सकते हैं। हर साल यूरोप में अवैध रूप से पकड़ी गई ईल की भारी मात्रा जब्त की जाती है। असली बड़ा कारोबार तो इन्हें एशिया तक तस्करी करने में है।”
उन्होंने आगे बताया कि भारी मुनाफे और स्थानीय मछुआरों के छोटे-मोटे अपराधों पर लगने वाले कम जुर्माने के कारण तस्कर यह जोखिम उठाने को तैयार रहते हैं। हालांकि, जब इसमें आपराधिक गिरोह शामिल होते हैं, तो जुर्माना अवैध रूप से तस्करी की गई ईल की कीमत का 6 गुना तक हो सकता है
चीन, दक्षिण कोरिया, और जापान जैसे देशों में इसकी मांग कीमतों को बढ़ा रही है। साथ ही, एक जैविक खासियत भी इसकी वजह है: अब तक, ईल मछली को कृत्रिम रूप से प्रजनन कराना बेहद मुश्किल रहा है। इसका मतलब है कि फिश फार्मों में जहां ईल को महंगे रेस्तरां में बेचने से पहले बड़ा किया जाता है, उन्हें प्राकृतिक रूप से पैदा हुए छोटे ईल की लगातार जरूरत होती है। कभी-कभी, तस्करी की गई वही ईल मछली सुशी बाजार के लिए फिलेट (मांस के टुकड़ों) के रूप में वापस यूरोप आ जाती है
संरक्षणवादियों को उम्मीद थी कि जब यूरोपीय संघ ने 2010 में इस प्रजाति के निर्यात पर रोक लगाई थी, तो इन पर दबाव कम होगा। इसके बजाय, संगठित आपराधिक गिरोहों ने इस बाजार पर तेजी से कब्जा जमा लिया। अब इस गैर-कानूनी व्यापार से सबसे ज्यादा मांग वाले सालों में अनुमानित तौर पर 3 अरब यूरो का मुनाफा होता है
जर्मन एंगलिंग एसोसिएशन में पॉलिसी और साइंस के प्रमुख फ्लोरियान स्टाइन ने कहा, “हमारा अनुमान था कि हर साल ज्यादा से ज्यादा 100 टन ग्लास ईल की तस्करी होती है। इतनी मात्रा का मतलब लगभग 30 करोड़ मछलियां हैं। हालांकि, गैर-कानूनी व्यापार में उनके संपर्कों से मिली जानकारी से उन्हें यह निष्कर्ष निकालना पड़ा कि यह ‘बहुत कम करके आंका गया अनुमान’ था
अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां भी सख्ती कर रही हैं। यूरोपोल के ‘ऑपरेशन लेक’ के तहत, 2024 और 2025 के बीच 22 टन ग्लास ईल जब्त की गईं और 26 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। इंटरपोल के सांचेज रोमेरो ने बताया, “पूरे यूरोप में कानून प्रवर्तन एजेंसियों का काफी दबाव रहा है। इसलिए, अपराधी समूह हमेशा नए रास्ते तलाशते रहते हैं।”
स्टाइन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईल की तस्करी पर अपनी डॉक्टरेट की थीसिस लिखी है और वे जर्मन सरकार को सलाह भी देते हैं। उन्होंने कहा कि 2020 के बाद से तस्करी बढ़ी है और गैर-कानूनी व्यापार के रास्ते और भी मुश्किल हो गए हैं
वह बताते हैं, “दस साल पहले, मैड्रिड एयरपोर्ट तस्करी के सबसे बड़े अड्डों में से एक था।” इसकी वजह थी कि यह उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल में मछली पकड़ने वाले इलाकों के पास मौजूद था
पूर्वी एशिया जाने वाली उड़ानों पर स्पेनिश अधिकारियों की कड़ी जांच के कारण तस्करों को अपने तरीके बदलने पड़े। जानकारों का कहना है कि अब मोरक्को, मॉरिटानिया और सेनेगल से होकर उत्तरी अफ्रीका से गुजरने वाला एक नया रास्ता बहुत अहम हो गया है
इस रास्ते के आकर्षक होने की एक वजह भौगोलिक स्थिति भी है। जिब्राल्टर जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे बिंदु पर सिर्फ 14 किलोमीटर चौड़ा है और यह जहाजों की आवाजाही का एक व्यस्त केंद्र है। मोरक्को के खोजी पत्रकार यासिर अल-मख्तूम ने डीडब्ल्यू को बताया, “हम जानते हैं कि इस जलडमरूमध्य के रास्ते कई तरह के ड्रग्स की भी तस्करी होती है।”
यूरोपीय ईल मोरक्को की नदियों और मुहानों में भी पाई जाती हैं। हालांकि, देश ने 12 सेंटीमीटर (4।7 इंच) से छोटे आकार की ग्लास ईल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है, फिर भी वह ईल मछली के कानूनी घरेलू व्यापार का उद्योग खड़ा कर रहा है। विशेषज्ञों को डर है कि यह उद्योग यूरोप से तस्करी करके लाई जा रही मछलियों को छिपाने के लिए ढाल की तरह काम कर रहा है
मोरक्को से तस्कर ईल मछलियों को कई रास्तों से एशिया भेजते हैं। इसके लिए, वे हमेशा किसी जटिल तरीके का इस्तेमाल नहीं करते। ग्लास ईल को सामान्य सूटकेस में भरकर घरेलू उड़ानों के जरिए आसानी से ले जाया जा सकता है। इन्हें थोड़े से पानी से भरी थैलियों में रखा जाता है और तापमान को सही बनाए रखने के लिए पैकिंग की जाती है। इन परिस्थितियों में वे 48 घंटे तक जीवित रह सकती हैं। एक बार एशिया पहुंचने के बाद, इन्हें फिश फार्मों में भेज दिया जाता है
ईल मछलियां समुद्र और नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत को मापने का एक मुख्य जरिया हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अलग-अलग इलाकों के बीच उनकी लंबी यात्राएं उन्हें उन समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाती हैं जो अन्य जीवों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा, वे बगुले, ऊदबिलाव और बड़ी मछलियों के लिए भोजन का एक अहम स्रोत भी हैं
समुद्री जीवविज्ञानी डियाज ने कहा, “लेकिन इसके पूरी तरह विलुप्त हो जाने का क्या असर होगा, इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है।”
यूरोपीय संघ के नियमों के तहत, सदस्य देशों को ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे 40 फीसदी वयस्क ईल प्रजनन के लिए वापस सार्गासो सागर लौट सकें। डियाज यह भी सुनिश्चित करना चाहती हैं कि कम से कम 40 फीसदी ग्लास ईल सार्गासो सागर से वापस आ सकें
हालांकि, यूरोपीय ईल ही एकमात्र ऐसी ईल प्रजाति नहीं है जिस पर खतरा मंडरा रहा है। 2025 के CITES (साइटिस) वन्यजीव सम्मेलन में मीठे पानी की ईल की सभी प्रजातियों को अवैध और गैर-टिकाऊ व्यापार से बचाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था। स्टाइन जैसे विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मछली का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है
स्टाइन कहते हैं, “अगले सम्मेलन में इस प्रस्ताव को फिर से पेश किया जाना चाहिए। मुझे नहीं समझ आता कि हम इसके बिना इस समस्या को कैसे हल कर सकते हैं। इस प्रतिबंध की वकालत करने के लिए और अधिक लॉबिंग करने एवं गठबंधन बनाने की जरूरत है।”
इजागुइरे कहते हैं, “हमारे लिए ईल सिर्फ एक मछली नहीं है, बल्कि यह सदियों से हमारी पहचान का हिस्सा रही है।” उनके जैसे मछुआरों के लिए, ईल की हिफाजत के पुख्ता इंतजाम आने वाली पीढ़ियों के टिकाऊ भविष्य की एकमात्र उम्मीद है
स्रोत: readnownews.in


