चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग वर्ष 2019 के बाद पहली बार भारत दौरे पर पहुंचे हैं। गलवान घाटी विवाद के बाद भारत-चीन संबंधों में आई खटास को पाटने और द्विपक्षीय व्याप…
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग वर्ष 2019 के बाद पहली बार भारत दौरे पर पहुंचे हैं। गलवान घाटी विवाद के बाद भारत-चीन संबंधों में आई खटास को पाटने और द्विपक्षीय व्यापार तथा सीमाई स्थिति की समीक्षा के लिए मोदी-जिनपिंग की मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। दूसरी ओर, यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) के जारी तनाव के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की भारत में मौजूदगी ने इस सम्मेलन के भू-राजनीतिक वजन को कई गुना बढ़ा दिया है
पश्चिमी देशों और अमेरिका के कड़े दबाव के बावजूद भारत ने रूस और ईरान जैसे देशों के शीर्ष नेताओं की अगवानी कर यह साबित कर दिया है कि नई दिल्ली अपनी विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता पर किसी तीसरे देश का प्रभाव बर्दाश्त नहीं करेगी
सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार को स्थानीय मुद्राओं में बढ़ावा देने और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने के प्रस्ताव पर गंभीरता से चर्चा हो रही है
डोनाल्ड ट्रम्प पर क्या होगा असर
ऐसा माना जा रहा है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी सरकार की प्राथमिकताओं के लिहाज से दिल्ली का यह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन अमेरिका के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती प्रस्तुत कर सकता है
‘डॉलर’ के वर्चस्व को चुनौती : ट्रम्प की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और व्यापक टैरिफ लागू करने के फैसलों के जवाब में ब्रिक्स देश अपनी मुद्राओं और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को मजबूत कर रहे हैं। यदि ब्रिक्स देश डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करते हैं, तो इससे अमेरिकी डॉलर की वैश्विक साख और ट्रम्प के आर्थिक प्रभाव को सीधा झटका लगेगा
अमेरिकी प्रतिबंधों की धज्जियां : ट्रम्प प्रशासन द्वारा रूस और ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को नजरअंदाज करते हुए भारत, चीन और ब्रिक्स के अन्य सदस्य देश उनके साथ खुले तौर पर आर्थिक और ऊर्जा सौदे कर रहे हैं। यह अमेरिकी प्रतिबंधों के असर को बेअसर करता है
चीन और रूस को अलग-थलग करने की रणनीति नाकाम : पश्चिमी देश और ट्रम्प प्रशासन लंबे समय से वैश्विक स्तर पर पुतिन और शी जिनपिंग को अलग-थलग करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिका के बेहद करीबी रणनीतिक साझेदार ‘भारत’ की धरती से इन नेताओं की हुंकार यह दिखाती है कि वॉशिंगटन की उन्हें अकेला थका देने की नीति सफल नहीं हो पा रही है
ट्रम्प की टैरिफ नीति पर दबाव : ट्रम्प द्वारा वैश्विक व्यापार में लगाए जा रहे टैरिफ के खिलाफ ब्रिक्स के मंच से एक जुटता की आवाज उठ रही है। भारत जैसा महत्वपूर्ण देश भी इस आर्थिक ध्रुवीकरण में ब्रिक्स के बहुपक्षीय व्यापार मॉडल को समर्थन दे रहा है, जो ट्रम्प के एकतरफा व्यापारिक दबावों का मुकाबला करने के लिए काफी है
नई दिल्ली में12-13 सितंबर तक होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत द्वारा की जा रही है। इसका मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” (लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण) है।
दरअसल, भारत की सरजमीं पर ब्रिक्स का आयोजन यह स्पष्ट संदेश देता है कि वैश्विक व्यवस्था अब केवल पश्चिमी या अमेरिकी निर्देशों से तय नहीं होगी, बल्कि नई दिल्ली, मॉस्को, बीजिंग और तेहरान का यह नया शक्ति-संतुलन ट्रम्प की विदेश नीति के लिए एक बड़ी पहेली बनने जा रहा है
स्रोत: readnownews.in


