ब्रिक्स सम्मेलन से पहले पीएम मोदी से पुतिन की मुलाकात, जानें कड़े वैश्विक दबाव के बीच कितनी मजबूत है भारत-रूस की दोस्ती

Nikhil Malhotra
4 Min Read

भारत और रूस के राजनयिक संबंध 1947 से हैं। वर्ष 2000 में दोनों देशों ने Strategic Partnership शुरू की और 2010 में इसे Special and Privileged Strategic Partnersh…

भारत और रूस के राजनयिक संबंध 1947 से हैं। वर्ष 2000 में दोनों देशों ने Strategic Partnership शुरू की और 2010 में इसे Special and Privileged Strategic Partnership का दर्जा दिया गया। रक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का लंबा सहयोग है

मोदी और पुतिन की मुलाकातें सिर्फ औपचारिक शिखर बैठकों तक सीमित नहीं रही हैं। दोनों नेताओं के बीच कई बार अनौपचारिक बातचीत भी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि 31 अगस्त 2026 को बिश्केक में मोदी-पुतिन की मुलाकात हुई थी और अब 11 सितंबर को पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं, जहां BRICS सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की फिर बातचीत हो रही है

भारत की सैन्य ताकत बनाने में रूस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है। सुखोई लड़ाकू विमान, T-90 टैंक, मिसाइल सिस्टम, हेलीकॉप्टर और परमाणु पनडुब्बियों से लेकर ब्रह्मोस जैसी संयुक्त परियोजनाओं तक रक्षा सहयोग फैला हुआ है। अब बातचीत का दायरा पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान, परमाणु ऊर्जा और नई रक्षा तकनीकों तक पहुंच रहा है

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत पर पश्चिमी देशों की ओर से रूस से दूरी बनाने का दबाव रहा। लेकिन मोदी सरकार ने रूस के साथ संवाद बनाए रखा और रूसी तेल की खरीद भी जारी रखी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि भारत रूस के हर कदम का समर्थन करता है। मोदी लगातार संवाद और कूटनीति से युद्ध खत्म करने की बात करते रहे हैं। अगस्त 2026 में पुतिन से मुलाकात में भी मोदी ने संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को रास्ता बताया

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस भारत के लिए कच्चे तेल का बेहद महत्वपूर्ण स्रोत बन गया। इससे भारत को अपेक्षाकृत सस्ता तेल मिला, लेकिन इसके साथ भारत-रूस व्यापार में बड़ा असंतुलन भी पैदा हुआ। अब दोनों देश सिर्फ तेल तक सीमित रहने के बजाय निवेश, व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और तकनीक में सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं

यही सबसे महत्वपूर्ण बात है। भारत और रूस के रिश्ते मजबूत हैं, लेकिन दोनों देशों के अपने-अपने राष्ट्रीय हित हैं। भारत एक तरफ रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा संबंध बनाए रखता है, तो दूसरी तरफ अमेरिका, यूरोप, जापान और अन्य पश्चिमी देशों के साथ भी रणनीतिक संबंध मजबूत कर रहा है। इसलिए इसे “रूस के खेमे में भारत” कहना सही नहीं होगा। भारत की नीति मूल रूप से रणनीतिक स्वायत्तता की है—जिस देश के साथ जिस क्षेत्र में भारत का हित है, वहां उसके साथ सहयोग

मौजूदा समय में इसकी अहमियत और बढ़ गई है। अमेरिका-ईरान युद्ध से तेल बाजार में उथल-पुथल, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता के बीच भारत रूस के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ भी संतुलन साध रहा है। 2026 में BRICS की मेजबानी कर रहा भारत इस संतुलन को और स्पष्ट रूप से दिखा रहा है

स्रोत: readnownews.in

Share This Article