भाजपा द्वारा नागांव सीट से उम्मीदवार बनाए गए देबाशीष शर्मा असम-मेघालय काडर के 2011 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सरका…
भाजपा द्वारा नागांव सीट से उम्मीदवार बनाए गए देबाशीष शर्मा असम-मेघालय काडर के 2011 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर भाजपा का दामन थामा है। उन्होंने असम सिविल सेवा (ACS) से अपना करियर शुरू किया था और बाद में पदोन्नत होकर IAS बने। वे नागांव के जिला आयुक्त, मोरीगांव के DC और गुवाहाटी नगर निगम (GMC) के कमिश्नर जैसे कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवा दे चुके हैं
देबाशीष शर्मा ने मुंबई में असम भवन के संयुक्त रेजीडेंट कमिश्नर और ‘दीपशिखा’ (कैंसर केयर ट्रस्ट) के संस्थापक के रूप में कैंसर मरीजों की सहायता के लिए विशेष पहचान बनाई। कोरोना महामारी (COVID-19) के दौरान मुंबई में फंसे राज्य के कैंसर रोगियों को सुरक्षित असम पहुंचाने में उनकी मानवीय भूमिका की काफी सराहना हुई थी। प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ वे असमिया संगीत, संस्कृति और जनसंपर्क के लिए भी स्थानीय नागरिकों के बीच जाने जाते हैं।
नागांव के पूर्व जिला आयुक्त रहने के कारण क्षेत्र के स्थानीय प्रशासनिक और सामाजिक समीकरणों पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। सबसे खास बात यह है कि इस से सांसद रहे प्रद्युत बोरदोलोई भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इसका भी देबाशीष को फायदा मिलेगा
मध्य असम में स्थित नागांव लोकसभा क्षेत्र राज्य का एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र रहा है। आजादी के बाद यह क्षेत्र लंबे समय तक कांग्रेस का अभेद्य किला रहा, देवकांत बरुआ जैसे वरिष्ठ नेता इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। हालांकि 1999 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता राजन गोहेन ने यहां से जीत दर्ज कर कांग्रेस का वर्चस्व तोड़ा।
इसके बाद राजन गोहेन ने लगातार 1999, 2004, 2009 और 2014 में चार बार यहां से जीत हासिल कर इस सीट को भाजपा के मजबूत गढ़ के रूप में स्थापित किया
2019 के आम चुनाव में कांग्रेस के प्रद्युत बोरदोलोई ने भाजपा के गढ़ में सेंध लगाते हुए जीत दर्ज की। 2024 के आम चुनाव में भी बोरदोलोई ने 50% से अधिक मत हासिल कर भाजपा प्रत्याशी सुरेश बोरा को बड़े अंतर से शिकस्त दी। इस सीट पर मुस्लिम और स्वदेशी असमिया मतदाताओं की संतुलित आबादी है। परिसीमन के बाद इस क्षेत्र की विधानसभा सीटों के समीकरण बदले हैं, जिससे यह बहुकोणीय मुकाबले का केंद्र बन गया है
स्रोत: readnownews.in


