मां अन्नपूर्णा की धरती काशी से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पोषण मेले में देश के विभिन्न राज्यों की पोषण परंपराओं, स्थानीय व्यंजनों और आहार विविधता की झलक देखने को मिली।
- 15 स्टॉल पर दिखी पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी पहल
- एक-दूसरे के पोषण प्रयोगों से सीखने का अवसर
- मिलेट्स नूडल्स से लेकर यूनिसेफ की साझेदारी तक
- मानदेय बढ़ोतरी और कैशलेस चिकित्सा सुविधा पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने जताया आभार
- मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से किया संवाद
- तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने सुनाई जुड़वां बच्चों की कहानी
मेले में अलग-अलग राज्यों के भोजन की सामग्री, स्वाद और बनाने की विधि भले ही अलग रही, लेकिन सभी में पोषण को प्राथमिकता दी गई। आयोजन ने विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों, अधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को एक-दूसरे की योजनाओं, प्रयोगों और बेहतर कार्यप्रणालियों को जानने और साझा करने का अवसर दिया।
15 स्टॉल पर दिखी पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी पहल
पोषण मेले में कुल 15 पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी स्टॉल लगाए गए। इनमें सात राज्यों के स्टॉल के अलावा आंगनवाड़ी सेवाओं से संबंधित स्टॉल भी शामिल रहे।
स्टॉलों के माध्यम से अनुपूरक पुष्टाहार, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई), सक्षम आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मिजोरम और बिहार के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने राज्यों की योजनाओं, पोषण आहार और नवाचारों की जानकारी साझा की।
एक-दूसरे के पोषण प्रयोगों से सीखने का अवसर
मिजोरम से आए जोयला ने बताया कि मेले में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों को उनके यहां तैयार होने वाले पोषण आहार और उसे बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी साझा करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के स्टॉल पर जाकर भी कई नई जानकारियां मिलीं।
राजस्थान की एकीकृत बाल विकास सेवा की उपनिदेशक डॉ. मंजू यादव ने अपने प्रदेश की योजनाओं से संबंधित स्टॉल लगाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में पोषण और बाल विकास से जुड़ी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं पोषण आहार प्लांट के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों के होम साइंस विभागों के माध्यम से भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा अक्षय पात्र के माध्यम से स्कूली बच्चों को गर्म और पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराने की पहल भी की जा रही है।
मिलेट्स नूडल्स से लेकर यूनिसेफ की साझेदारी तक
उत्तराखंड से आईं चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर नीतू पुलारा ने कहा कि ऐसे आयोजन विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को एक-दूसरे से सीखने और अपने अनुभव साझा करने का बेहतर मंच प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि आज के बच्चे फास्ट फूड की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में मिजोरम के स्टॉल पर मिलेट्स से तैयार नूडल्स का प्रयोग खासा उपयोगी लगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ के सहयोग से संचालित कार्यक्रमों की जानकारी को भी महत्वपूर्ण बताया।
नीतू पुलारा के मुताबिक, उत्तराखंड से आई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी दूसरे राज्यों के प्रतिनिधियों से संवाद कर कई नई बातें सीखीं। उन्होंने कहा कि आयोजन को लेकर कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह रहा।
मानदेय बढ़ोतरी और कैशलेस चिकित्सा सुविधा पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने जताया आभार
वाराणसी और आसपास के जिलों से कार्यक्रम में पहुंचीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने मानदेय में बढ़ोतरी और कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलने पर योगी सरकार के प्रति आभार जताया।
गाजीपुर से आईं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शशिकला और सहायिका स्नेहलता ने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें पोषण और बाल विकास से जुड़ी कई नई जानकारियां मिलीं। उन्होंने इन जानकारियों को अपने कार्यक्षेत्र में लागू करने की बात कही।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तारा पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वक्ताओं के संबोधन से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। उन्होंने कहा कि इन बातों को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और उनके परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से किया संवाद
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओडिशा, तमिलनाडु, गुजरात और गोरखपुर की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी ली।
तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने सुनाई जुड़वां बच्चों की कहानी
तमिलनाडु की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आर. रंजनी ने मुख्यमंत्री से ‘वणक्कम’ कहकर संवाद की शुरुआत की। उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र का अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक परिवार में 21 दिन के जुड़वां बच्चों की मां की मृत्यु हो गई थी।
ऐसे कठिन समय में उन्होंने परिवार के सदस्यों को समझाया और आंगनवाड़ी केंद्र के माध्यम से बच्चों के पालन-पोषण में सहयोग किया। उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर भी परिवार की मदद की। आर. रंजनी ने बताया कि दोनों बच्चे पिछले दो वर्षों से आंगनवाड़ी केंद्र आ रहे हैं।


