बालिकाओं की सुरक्षा और गरिमा पर योगी सरकार का फोकस, 450 मास्टर ट्रेनर्स होंगे तैयार

shikha verma
5 Min Read

योगी सरकार बालिकाओं की शिक्षा को उनके आत्मसम्मान, सुरक्षा, गरिमा और नेतृत्व क्षमता से जोड़ते हुए विद्यालयों के वातावरण को अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसी उद्देश्य से शिक्षकों को बच्चों के आत्मसम्मान और मानसिक विकास से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

प्रशिक्षण में रूप-रंग और शारीरिक बनावट को लेकर बच्चों को चिढ़ाने की प्रवृत्ति, बॉडी इमेज, सोशल मीडिया के प्रभाव, अपने शरीर और उसकी क्षमताओं को समझने तथा लैंगिक रूढ़ियों जैसे विषयों पर शिक्षकों की समझ विकसित की जा रही है।

450 मास्टर ट्रेनर्स को किया जाएगा तैयार

विशेष परियोजना फॉर इक्विटी के तहत मीना मंच कार्यक्रम और सेल्फ-एस्टीम परियोजना के लिए दो बैच में 100 प्रतिभागियों का दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण शुरू हुआ है। इस पहल के तहत कुल 450 मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों के संवेदनशील अनुभवों को समझने और उनके साथ प्रभावी एवं सम्मानजनक संवाद करने के लिए तैयार करना है। इससे विद्यालयों में सुरक्षित, सहभागी और सकारात्मक वातावरण को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

बॉडी इमेज और सोशल मीडिया पर बच्चों से संवाद

प्रशिक्षण के दौरान चार नई कॉमिक पुस्तकों को शिक्षण संसाधन के तौर पर शामिल किया गया है। इनके जरिए बच्चों को रूप-रंग या शारीरिक बनावट के आधार पर चिढ़ाने, शरीर को लेकर बनी धारणाओं, अपने शरीर की क्षमताओं और सोशल मीडिया के प्रभाव जैसे विषयों को समझने के तरीकों पर चर्चा की जा रही है।

इन संसाधनों के माध्यम से बच्चों की विद्यालय में नियमित उपस्थिति, नामांकन और विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के उपायों का भी अभ्यास कराया जाएगा।

लैंगिक रूढ़ियों की पहचान पर जोर

प्रशिक्षण में मीना मंच के गठन, ‘पॉवर एंजिल’ की भूमिका और सहभागितापूर्ण सहजीकरण की प्रक्रिया को भी शामिल किया गया है। एसटीएआरएस सिद्धांत के जरिए बच्चों की बात बिना किसी पूर्वधारणा के सुनने, हर आवाज को महत्व देने और उनके अनुभवों से सीखने की प्रक्रिया समझाई जा रही है।

शिक्षकों को लैंगिक रूढ़ियों की पहचान करने और कॉमिक्स व कक्षा गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के साथ इन मुद्दों पर संवेदनशील संवाद करने का अभ्यास भी कराया जा रहा है।

पॉक्सो अधिनियम के जरिए बाल सुरक्षा पर फोकस

प्रशिक्षण के पहले दिन लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों पर चर्चा की गई। इसका उद्देश्य शिक्षकों को बाल सुरक्षा से जुड़े प्रमुख पहलुओं के प्रति जागरूक करना है।

मॉक प्रदर्शन और रचनात्मक प्रतिक्रिया के जरिए प्रतिभागियों के सहजीकरण कौशल को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही बच्चों और शिक्षकों से जुड़ी कहानियों को एकत्र करने, उनका दस्तावेजीकरण करने और उन्हें प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर भी काम किया जाएगा।

‘प्रगति के पंख’ मॉड्यूल से किशोरों को जोड़ने की तैयारी

प्रशिक्षण के दूसरे दिन संशोधित ‘प्रगति के पंख’ मॉड्यूल के चार नए अध्यायों, 13 सत्रों और शिक्षक मार्गदर्शिका की जानकारी दी जाएगी। समूह अभ्यास और मॉक सत्रों के माध्यम से शिक्षकों को इन विषयों को किशोर-किशोरियों के दैनिक जीवन और पाठ्यक्रम से जोड़ने का अभ्यास कराया जाएगा।

इसके साथ ही ‘अरमान’ मॉड्यूल और अभिभावक सत्रों से संबंधित जानकारी भी दी जाएगी।

मासिक धर्म स्वास्थ्य और गरिमा पर भी जोर

प्रशिक्षण में मासिक धर्म स्वास्थ्य, गरिमा और विद्यालयों की जिम्मेदारियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। इसमें सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय, पानी की उपलब्धता, आवश्यक स्वच्छता उत्पाद, उचित निस्तारण, गोपनीयता और जागरूकता जैसे विषयों पर विद्यालय स्तर पर व्यावहारिक कदम तय करने का अभ्यास कराया जाएगा।

इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय के डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य (2026) मामले के प्रमुख निहितार्थों पर भी चर्चा प्रस्तावित है।

‘बालिकाओं को आत्मसम्मान और नेतृत्व का वातावरण देना सरकार की प्राथमिकता’

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार बालिकाओं को शिक्षा के साथ आत्मसम्मान, सुरक्षा और नेतृत्व का वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि रूप-रंग, शारीरिक बनावट, सोशल मीडिया और लैंगिक रूढ़ियों जैसे संवेदनशील विषयों को समझना शिक्षकों के लिए जरूरी है। मीना मंच के माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षित करने से विद्यालयों में बच्चों के साथ अधिक संवेदनशील और प्रभावी संवाद को मजबूती मिलेगी।

‘प्रशिक्षण से विद्यालय स्तर तक पहुंचेगी संवेदनशीलता’

महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि बच्चों के आत्मसम्मान और सुरक्षित वातावरण के लिए शिक्षकों का संवेदनशील होना बेहद महत्वपूर्ण है।

Share This Article
Leave a Comment