‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’, बेबी रानी मौर्य ने पोषण और बाल विकास पर दिया जोर

shikha verma
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नौवें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ के अवसर पर उत्तर प्रदेश की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों के पोषण और उनके प्रारंभिक विकास की जिम्मेदारी निभाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार कर रही हैं।

बेबी रानी मौर्य ने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को पोषण के साथ-साथ उनके प्रारंभिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

पोषण के साथ प्रारंभिक बाल विकास पर जोर

मंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के लिए हॉट कुक्ड मील की व्यवस्था, सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेही जैसे पहलुओं को मजबूत किया जा रहा है। इसके अलावा पोषण के साथ प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के लिए किताबें और खिलौने भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उनके सीखने और मानसिक विकास को बेहतर वातावरण मिल सके।

‘पोषण माह स्वस्थ और सशक्त भारत का संकल्प’

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण माह केवल कुपोषण से मुक्ति का अभियान नहीं है, बल्कि स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प भी है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में पोषण अभियान की शुरुआत की थी। आज यह अभियान जनभागीदारी के माध्यम से लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार की योजनाएं जब आम लोगों के जीवन से जुड़ती हैं तो वे धीरे-धीरे सामाजिक बदलाव और जनभागीदारी का हिस्सा बन जाती हैं।

अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि देशभर में 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं।

महिला सुरक्षा को लेकर यूपी सरकार की सराहना

केंद्रीय मंत्री ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार की नीतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने जनविश्वास को विकास की आधारशिला बनाया है।

उन्होंने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय थी, लेकिन 2017 के बाद राज्य सरकार ने महिला सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया।

150 करोड़ से अधिक जागरूकता गतिविधियों का दावा

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री और मध्य प्रदेश के धार से सांसद सावित्री ठाकुर ने काशी को नमन करते हुए पोषण अभियान की उपलब्धियों का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में पोषण अभियान के तहत देशभर में 150 करोड़ से अधिक जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना के जरिए बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।

अलग-अलग राज्यों की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों से आईं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस तरह आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण एवं स्वास्थ्य में भूमिका निभा रहे हैं।

गुजरात के गांधीनगर से आईं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भावना ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों की सुविधाओं में सुधार होने से लोगों का भरोसा बढ़ा है। अभिभावक अब अपने बच्चों को नियमित रूप से केंद्रों पर भेज रहे हैं। गर्भवती महिलाएं भी पोषण और खानपान को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सलाह लेती हैं।

उन्होंने बताया कि कई बच्चे घर पर खाना खाने में आनाकानी करते थे, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र पर उनकी जरूरत और पसंद के अनुसार भोजन मिलने से वे रुचि के साथ खाना खाने लगे।

‘आंगनबाड़ी कार्यकर्ता फ्रंटलाइन वॉरियर’

तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई से आईं आर. शंकरी ने बताया कि जन्म से छह माह तक शिशुओं के स्वास्थ्य और विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों में बेहतर विकास देखकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को संतोष होता है कि उनके प्रयास देश के भविष्य को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण और बाल विकास के क्षेत्र का ‘फ्रंटलाइन वॉरियर’ बताया।

बच्चों के वजन और लंबाई की नियमित निगरानी

गोरखपुर के बसियाखोर आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता संध्या सिंह ने बताया कि बच्चों के वजन और लंबाई की समय-समय पर जांच की जाती है। इससे बच्चों की पोषण स्थिति का आकलन करने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा कि कुपोषण की ओर बढ़ रहे बच्चों की विशेष निगरानी की जाती है। साथ ही उनके अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों के खानपान और देखभाल को लेकर जरूरी जानकारी और सलाह दी जाती है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बच्चों के बेहतर पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक विकास के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत करना जरूरी है। जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से पोषण अभियान को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया।

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