उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले में दो इस्तीफों और आठ गिरफ्तारियों के बाद भी कई सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच समिति (SIT) अपनी जांच जारी रखे हुए है।
इसी बीच, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी से मीडिया ने इस मामले में उनकी जिम्मेदारी को लेकर सवाल किए। बातचीत के दौरान कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों ने इंटरव्यू में हस्तक्षेप करने की कोशिश की, जबकि पत्रकार ने अपना सवाल जारी रखा।
सवाल के जवाब में गोविंद देव गिरी ने कहा कि ट्रस्ट के प्रत्येक सदस्य की अपनी जिम्मेदारी है और उनकी भी जिम्मेदारी बनती है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी भूमिका केवल ट्रस्ट के खातों में जमा होने वाले धन का लेखा-जोखा रखने तक सीमित है। उन्होंने कहा कि दानपात्र (हुंडी) में जमा राशि की गिनती और उससे जुड़ी प्रक्रिया उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा नहीं रही है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस मामले में कोषाध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगे, तो उन्होंने कहा, “मैं इस्तीफा क्यों दूं? इस मामले से मेरा कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। मेरा दायित्व केवल ट्रस्ट के खातों में आने वाली राशि का हिसाब रखना है।”
गौरतलब है कि चढ़ावा चोरी का मामला सार्वजनिक रूप से तब चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस संबंध में सवाल उठाए। शुरुआती दौर में ट्रस्ट की ओर से चोरी की बात से इनकार किया गया था, लेकिन बाद में ट्रस्ट ने घटना की पुष्टि करते हुए जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। जांच के दौरान ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की गई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।


