मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का शुभारंभ किया। इसके साथ ही यूपीकॉस पोर्टल और वेबसाइट की लॉन्चिंग तथा निगम के लोगो का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मचारियों को बढ़े हुए पारिश्रमिक के चेक भी वितरित किए।
- पांच तारीख तक सीधे खाते में पहुंचेगा पारिश्रमिक
- मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकेगा कर्मचारी
- श्रेणी और योग्यता के आधार पर तय होगा पारिश्रमिक
- दुर्घटना में परिवार को 20 से 40 लाख रुपये तक का बीमा
- स्वास्थ्य बीमा और मातृत्व अवकाश की सुविधा
- ‘तीन खेमों’ की व्यवस्था खत्म करने का दावा
- 2017 से पहले की व्यवस्था पर साधा निशाना
- 20 लाख लोगों को सुरक्षा देने का लक्ष्य
- यूपी की विकास यात्रा में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका
- अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को नौकरी का दावा
- महिलाओं और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था का लाभ प्रदेश के 3.5 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों के साथ उनके परिवारों को भी मिलेगा। अनुमान के मुताबिक करीब 17 से 20 लाख लोग इससे सीधे या परोक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।
पांच तारीख तक सीधे खाते में पहुंचेगा पारिश्रमिक
सीएम योगी ने कहा कि अब आउटसोर्स कर्मचारियों को पारिश्रमिक के लिए एजेंसियों या विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच पारिश्रमिक सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में भेजा जाएगा। ईपीएफ और ईएसआई का अंशदान भी नियमित रूप से जमा किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आउटसोर्स एजेंसी को सर्विस चार्ज सरकार देगी। कर्मचारी के पारिश्रमिक से एजेंसी किसी प्रकार की कटौती नहीं कर सकेगी।
मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकेगा कर्मचारी
नई व्यवस्था के तहत आउटसोर्स एजेंसी किसी कर्मचारी को मनमाने तरीके से नौकरी से नहीं निकाल सकेगी। यदि किसी कर्मचारी को हटाने की आवश्यकता होगी तो एजेंसी को पहले सरकार को इसकी जानकारी देनी होगी। मामले की जांच के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे गलत रिपोर्ट या मनमाने फैसलों के आधार पर कर्मचारियों के उत्पीड़न पर रोक लगेगी।
श्रेणी और योग्यता के आधार पर तय होगा पारिश्रमिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब आउटसोर्स कर्मचारियों का पारिश्रमिक किसी व्यक्ति की कृपा या एजेंसी की मनमानी पर निर्भर नहीं होगा। कर्मचारी की श्रेणी और शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप पारिश्रमिक सुनिश्चित किया जाएगा।
भर्ती प्रक्रिया राज्य सरकार की आरक्षण नीति के अनुरूप ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से होगी। भर्ती से लेकर पोस्टिंग, उपस्थिति, भुगतान, ग्रेच्युटी, बीमा और अन्य सेवा लाभों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी।
कर्मचारी यूपीकॉस पोर्टल के माध्यम से अपनी सेवा संबंधी जानकारी, उपस्थिति, भुगतान और कटौती का विवरण देख सकेंगे। किसी समस्या की स्थिति में पोर्टल पर शिकायत भी दर्ज कराई जा सकेगी।
दुर्घटना में परिवार को 20 से 40 लाख रुपये तक का बीमा
मुख्यमंत्री ने बताया कि आउटसोर्स सेवा निगम के लिए भारतीय स्टेट बैंक के साथ एमओयू किया गया है। इसके तहत निर्धारित श्रेणी के अनुसार कर्मचारी की घटना-दुर्घटना या आपदा में मृत्यु अथवा नुकसान की स्थिति में परिवार को 20 से 40 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा।
इसके अलावा अग्निकांड की स्थिति में 10 लाख रुपये, आकस्मिक दवा के लिए 5 लाख रुपये और आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपये तक की सुविधा उपलब्ध होगी।
बच्चों की शिक्षा के लिए भी सहायता का प्रावधान किया गया है। बेटे की शिक्षा के लिए 8 लाख और बेटी की शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकेगी। दो पुत्रियों के विवाह के लिए भी 8 से 10 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान बताया गया है। कर्मचारी की मृत्यु होने पर बैंक के माध्यम से परिवार को तत्काल 50 हजार रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे।
स्वास्थ्य बीमा और मातृत्व अवकाश की सुविधा
सीएम योगी ने कहा कि ईएसआई के माध्यम से कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जहां ईएसआई अस्पताल में आवश्यक उपचार उपलब्ध नहीं होगा, वहां आयुष्मान भारत योजना से जोड़कर इलाज की सुविधा देने का प्रयास किया जाएगा।
आउटसोर्स कर्मचारियों और उनके परिवार को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर भी मिलेगा। इसके साथ ही मातृत्व अवकाश समेत अन्य वैधानिक सेवा लाभ सुनिश्चित किए जाएंगे।
‘तीन खेमों’ की व्यवस्था खत्म करने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले आउटसोर्स कर्मचारी, एजेंसी और सरकारी विभाग तीन अलग-अलग खेमों में बंटे हुए थे। कर्मचारी अपनी समस्या लेकर अलग-अलग जगह जाता था, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं होती थी।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि कर्मचारी को यह भरोसा हो कि वह अकेला नहीं है। समय पर वेतन, भविष्य निधि, बीमा और मेहनत के अनुरूप पारिश्रमिक उसका अधिकार है और सरकार इन अधिकारों को सुनिश्चित करेगी।
2017 से पहले की व्यवस्था पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 2017 से पहले आउटसोर्स कर्मचारियों को बोझ की तरह देखा जाता था। उन्होंने कहा कि उस समय आउटसोर्स एजेंसियों के जरिए भर्ती, यूनिफॉर्म और अन्य कार्यों के नाम पर कर्मचारियों का शोषण किया जाता था।
सीएम ने कहा कि भाजपा सरकार ने कर्मचारियों को बोझ नहीं, बल्कि मानव संसाधन के रूप में संपत्ति माना है। ‘सैफई-रामपुर सिंडिकेट’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब एजेंसियों के माध्यम से होने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण पर भी प्रहार किया जाएगा।
20 लाख लोगों को सुरक्षा देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी कर्मचारी को समय पर उसका अधिकार मिलने का असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इससे उसके बच्चों की पढ़ाई, परिवार का इलाज और भविष्य सुरक्षित होता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य निगम के माध्यम से करीब 20 लाख लोगों को सुरक्षा कवर प्रदान करना है। नई व्यवस्था में सरकारी विभाग, आउटसोर्स एजेंसी और कर्मचारी तकनीक आधारित पारदर्शी प्रणाली से जुड़ेंगे। इससे मानव संसाधन की जरूरत, रिक्तियों का अनुमान और मैनपावर की बेहतर योजना तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
यूपी की विकास यात्रा में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की साढ़े नौ वर्ष की विकास यात्रा का श्रेय स्थायी, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों समेत विभिन्न वर्गों को दिया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के दौर में काम करने का तरीका बदल सकता है, लेकिन मानव श्रम की गरिमा कभी खत्म नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों, युवाओं, महिलाओं, कारीगरों, एमएसएमई, स्टार्टअप और मेहनतकश नागरिकों को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रही है।
अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को नौकरी का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता देने के लिए आयोगों और बोर्डों में आवश्यक बदलाव किए गए हैं। पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने दावा किया कि अगले छह महीने में एक लाख नए युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक 2017 के बाद यूपी पुलिस में 2.25 लाख भर्तियां हुई हैं। प्रदेश में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या भी 10 हजार से बढ़कर करीब 44 हजार हो गई है।
सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। वहीं स्टार्टअप की संख्या 2017 के पहले के करीब 120 से बढ़कर अब 24 हजार से अधिक हो गई है।
महिलाओं और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को केवल खेती तक सीमित रखने के बजाय उन्हें कृषि अर्थव्यवस्था का उद्यमी बनाने की दिशा में काम कर रही है। वहीं ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ योजना के जरिए कारीगरों को तकनीक और बाजार से जोड़ा गया है।
महिला स्वयं सहायता समूहों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब एक करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं। कई जिलों में महिला मिल्क प्रोड्यूसर समूह भी सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।


