उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच योगी सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। शारदा और घाघरा समेत कई नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। राहत आयुक्त कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 12 जिले और 166 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं, जिससे करीब 64,402 लोग प्रभावित हुए हैं।
बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश में 86 राहत-बचाव टीमें तैनात की गई हैं। इनमें एनडीआरएफ की 18, एसडीआरएफ की 16 और पीएसी की 52 टीमें शामिल हैं। प्रशासन का फोकस प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ भोजन, चिकित्सा और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने पर है।
1,586 बाढ़ चौकियां और 1,263 शरणालय तैयार
सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत व्यवस्था को मजबूत करते हुए 1,586 बाढ़ चौकियां और 1,263 बाढ़ शरणालय स्थापित किए हैं। इनमें से 40 शरणालय वर्तमान में संचालित हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में नावों और मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
राहत कार्यों के लिए 5,849 नावें और 1,101 मोटरबोट उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में 308 राहत वितरण केंद्र बनाए गए हैं।
शारदा और घाघरा नदी के जलस्तर पर निगरानी
राहत आयुक्त कार्यालय की 16 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक लखीमपुर खीरी के पलियाकलां में शारदा नदी और बाराबंकी के एल्गिनब्रिज के पास घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। संबंधित विभाग दोनों नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
एक जून से 16 अगस्त तक प्रदेश में कुल 381 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 488.9 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। इस तरह मानसून अवधि में प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 22 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है।
लखीमपुर खीरी में सबसे ज्यादा बारिश
पिछले 24 घंटे में लखीमपुर खीरी में 92.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से काफी अधिक है। बहराइच में 62.5, शाहजहांपुर में 45.1, संभल में 41.8, चित्रकूट में 41.5 और लखनऊ में 40.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
वहीं, संभल में एक जून से 16 अगस्त के बीच सामान्य से 74.97 प्रतिशत, मेरठ में 73.81 प्रतिशत और मुजफ्फरनगर में 69.22 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।
NDRF, SDRF और PAC की टीमें मोर्चे पर
बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील जिलों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। प्रयागराज में एनडीआरएफ की तीन टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, फर्रुखाबाद, गोंडा, गोरखपुर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, वाराणसी और लखनऊ समेत कई जिलों में बचाव दल तैनात हैं।
लखनऊ में डूबने की घटनाओं से निपटने के लिए विशेष टीम भी लगाई गई है।
भोजन और चिकित्सा व्यवस्था पर भी जोर
बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए अब तक 15,133 खाद्यान्न पैकेट और 24,266 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही 22,720 ओआरएस पैकेट और 40,860 क्लोरीन टैबलेट भी बांटी गई हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 69 मेडिकल टीमें और 51 एंबुलेंस तैनात की गई हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है।
69 मकान क्षतिग्रस्त, जनहानि की सूचना नहीं
रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ के कारण अब तक 69 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। फिलहाल बाढ़ से किसी जनहानि या पशुहानि की सूचना नहीं है। प्रभावित पशुओं की संख्या 3,502 बताई गई है, जिनके लिए 154 क्विंटल भूसा वितरित किया गया है।
योगी सरकार ने संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और जरूरत के अनुसार बचाव एवं राहत संसाधनों को तत्काल सक्रिय किया जाए।


