दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP के प्रदर्शन को लेकर उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से पूर्व भाजपा विधायक विक्रम सिंह की बेटी यशस्वी राजे सिंह चर्चा में हैं। यशस्वी ने इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि CJP ने ऐसे लोगों को एक मंच पर लाने का काम किया है, जो आमतौर पर राजनीति से दूरी बनाए रखते हैं।
यशस्वी राजे ने एक इंटरव्यू में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भाषा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस्तीफे में जिम्मेदारी स्वीकार करने, पछतावे या माफी की भावना स्पष्ट रूप से नजर नहीं आती।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर जताई आपत्ति
यशस्वी ने कहा कि किसी बड़े विवाद के बाद इस्तीफा केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें जवाबदेही का भाव भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि छात्रों के भविष्य को नुकसान न पहुंचे और राष्ट्रविरोधी ताकतें स्थिति का फायदा न उठा सकें, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया।
यशस्वी ने कहा कि इस्तीफे की भाषा से उन्हें जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय खुद को सही ठहराने का प्रयास अधिक दिखाई दिया।
नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर भी सवाल
यशस्वी राजे ने नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस फैसले को निराशाजनक बताया और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
उन्होंने CJP के आंदोलन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास उन लोगों को जोड़ते हैं, जो सामान्य रूप से राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय नहीं रहते।
कौन हैं यशस्वी राजे सिंह?
यशस्वी राजे सिंह उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सदर सीट से पूर्व भाजपा विधायक विक्रम सिंह की बेटी हैं। विक्रम सिंह ने 2014 के उपचुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। यशस्वी के बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।


