उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भदोही जिले का नाम पुनः संत रविदास नगर किए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।
डॉ. निर्मल ने कहा कि संत रविदास जैसे महान संत, जिन्होंने सामाजिक समरसता और मानव कल्याण का संदेश दिया, उनके नाम से जुड़े जिले की पहचान को वापस स्थापित करना स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव अपने शासनकाल में संत रविदास के नाम से बने जिले का नाम बदलकर भदोही कर चुके थे।
उन्होंने कहा कि आज अखिलेश यादव पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की बात करते हैं, लेकिन उनके शासनकाल में दलित और सामाजिक न्याय से जुड़े महापुरुषों के नाम पर बने कई संस्थानों और जिलों के नाम बदले गए। डॉ. निर्मल ने आरोप लगाया कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और अन्य महापुरुषों से जुड़े नामों को बदलना उनके दलित हितों के दावों पर सवाल खड़े करता है।
डॉ. निर्मल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार महापुरुषों के सम्मान और उनकी विरासत को संरक्षित करने का कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि लखनऊ में डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर भव्य स्मारक का निर्माण इसी दिशा में एक कदम है।
उन्होंने कहा कि संत रविदास, डॉ. आंबेडकर, छत्रपति शाहू जी महाराज, ज्योतिबा फुले और भगवान बुद्ध जैसे महापुरुषों ने समाज में समानता, न्याय और मानव कल्याण का संदेश दिया। ऐसे महापुरुषों के नाम और योगदान को सम्मान देना समाज के लिए आवश्यक है।
डॉ. निर्मल ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने कई जिलों और संस्थानों के नामों में बदलाव किए, जिनमें महामाया नगर, पंचशील नगर और महात्मा ज्योतिबा फुले के नाम से जुड़े जिले भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की विरासत का सम्मान करना सामाजिक न्याय और समतामूलक समाज की स्थापना के लिए जरूरी है।


