गाजीपुर में विनीत राय हत्याकांड के आरोपी कमलेश के एनकाउंटर के बाद उत्तर प्रदेश में एक बार फिर पुलिस मुठभेड़ों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल एनकाउंटर की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि राज्य सरकार इसे अपराध और माफिया के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बता रही है।
हालिया विवाद के बीच यूपी में वर्ष 2017 से अब तक हुए एनकाउंटरों के आंकड़े भी चर्चा में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 31 मार्च 2017 से 5 सितंबर 2024 तक कुल 207 अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए। इनमें विभिन्न जातियों और समुदायों के आरोपी शामिल हैं, जिनमें 67 मुस्लिम और 138 हिंदू बताए गए हैं।
योगी सरकार में कई चर्चित एनकाउंटर
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के कार्यकाल में कई हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर हुए, जिनमें गैंगस्टर Vikas Dubey, Asad Ahmad और Anil Dujana जैसे नाम शामिल रहे। इन कार्रवाइयों को सरकार ने संगठित अपराध के खिलाफ अभियान का हिस्सा बताया।
अपराध के आंकड़ों में कमी का दावा
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में हत्या, अपहरण, डकैती, चोरी और बलात्कार जैसे कई प्रमुख अपराधों के मामलों में पिछले वर्षों की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। सरकार इसे अपनी सख्त कानून-व्यवस्था नीति का परिणाम मानती है।
विपक्ष बनाम सरकार
विपक्षी दलों का आरोप है कि एनकाउंटर की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में की जा रही है और प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात दोहराते रहे हैं। सरकार का दावा है कि माफिया, गैंगस्टर और संगठित अपराध के खिलाफ चलाए गए अभियानों से प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है।


