एलपीजी के दाम में फिर बढ़ोतरी, चार महीने में 89 रुपये महंगा हुआ सिलेंडर

shikha verma
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देशभर में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। शनिवार रात से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये का इजाफा कर दिया गया, जिसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 942 रुपये हो गई है।

यह पिछले तीन महीनों में दूसरी बार है जब घरेलू एलपीजी के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले मार्च 2026 में प्रति सिलेंडर 60 रुपये की वृद्धि की गई थी। इस तरह चार महीनों में घरेलू गैस की कीमतों में कुल 89 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है।

कांग्रेस का सरकार पर हमला

गैस की कीमतों में वृद्धि को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार की आलोचना की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि लगातार बढ़ती एलपीजी कीमतें आम परिवारों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल रही हैं।

कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया कि यदि ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध हैं तो फिर उपभोक्ताओं को बार-बार कीमतों में बढ़ोतरी का सामना क्यों करना पड़ रहा है। पार्टी ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के बीच गैस सिलेंडर की घटती रीफिल दरों को भी चिंता का विषय बताया।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी सवाल उठाया कि जब सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां अच्छा मुनाफा कमा रही हैं, तब एलपीजी की कीमतों में लगातार वृद्धि का औचित्य क्या है।

सरकार क्या कह रही है?

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ रहा है। मध्य-पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं के कारण ऊर्जा लागत बढ़ी है, जिसका प्रभाव भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है।

कमर्शियल सिलेंडर भी हुए महंगे

घरेलू गैस के साथ-साथ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भी हाल के महीनों में कई बार बढ़ोतरी की गई है। जून की शुरुआत में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 42 रुपये की वृद्धि की गई थी।

करोड़ों परिवारों पर असर

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में 33 करोड़ से अधिक परिवार एलपीजी कनेक्शन का उपयोग करते हैं। इनमें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत जुड़े करोड़ों लाभार्थी भी शामिल हैं। ऐसे में घरेलू गैस की कीमतों में हुई ताजा बढ़ोतरी का असर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के मासिक खर्च पर पड़ सकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में नरमी नहीं आती है, तो आने वाले समय में ईंधन और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

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