आज के डिजिटल समय में मोबाइल ऐप्स हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी हैं, लेकिन इसी के साथ डेटा प्राइवेसी का खतरा भी बढ़ गया है। कई ऐप्स जरूरत से ज्यादा परमिशन लेकर यूजर्स का निजी डेटा कलेक्ट करती हैं और उसे थर्ड-पार्टी कंपनियों तक पहुंचा सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकतर लोग ऐप इंस्टॉल करते समय परमिशन को ध्यान से नहीं पढ़ते और सभी एक्सेस को ‘Allow’ कर देते हैं, जो आगे चलकर जोखिम भरा साबित हो सकता है।
हेल्थ और लाइफस्टाइल ऐप्स पर सवाल
स्लीप ट्रैकिंग, फिटनेस और कैलोरी मॉनिटरिंग जैसी ऐप्स अक्सर माइक्रोफोन, कॉन्टैक्ट्स और फोटो गैलरी तक एक्सेस मांगती हैं, जबकि इनके लिए इसकी जरूरत नहीं होती। ऐसे मामलों में यूजर डेटा के गलत इस्तेमाल और थर्ड-पार्टी को बेचने के आरोप भी लग चुके हैं।
नेविगेशन ऐप्स से लोकेशन ट्रैकिंग का खतरा
गूगल मैप्स जैसी ऐप्स लोकेशन के लिए जरूरी होती हैं, लेकिन कई ऐप्स यूजर की पूरी लोकेशन हिस्ट्री सेव करती हैं। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि यूजर कब, कहां और किन जगहों पर जाता है, जो विज्ञापन कंपनियों के लिए बेहद मूल्यवान डेटा होता है।
शॉपिंग ऐप्स भी कर सकती हैं डेटा ट्रैकिंग
कई शॉपिंग ऐप्स पर भी जरूरत से ज्यादा डेटा कलेक्शन के आरोप लगते हैं। कई बार यूजर को उन्हीं प्रोडक्ट्स के विज्ञापन दिखने लगते हैं, जिनके बारे में उन्होंने हाल ही में बात की होती है या सर्च किया होता है।
कैसे चेक करें ऐप परमिशन?
एंड्रॉयड यूजर्स सेटिंग्स में जाकर ‘Apps’ सेक्शन से किसी भी ऐप की परमिशन देख और बदल सकते हैं। वहीं iPhone यूजर्स ‘Settings’ में जाकर ‘Privacy & Security’ सेक्शन में ऐप एक्सेस कंट्रोल कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अनावश्यक ऐप्स को डिलीट करना और परमिशन को समय-समय पर रिव्यू करना आपकी डिजिटल सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।


