मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए अगस्त माह में दो विशेष स्कूल आधारित टीकाकरण अभियान शुरू करने जा रही है। इन अभियानों के माध्यम से बच्चों को डिप्थीरिया, टिटनेस, काली खांसी, खसरा और रूबेला जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
पहले चरण में 3 से 7 अगस्त तक टीडी/टीडैप (टिटनेस, डिप्थीरिया और पर्टुसिस) टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में 18 से 28 अगस्त तक खसरा-रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान आयोजित किया जाएगा। इन अभियानों में प्रदेश के सभी 75 जिलों के परिषदीय विद्यालयों, सहायता प्राप्त विद्यालयों, मदरसों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अध्ययनरत पात्र बच्चों को शामिल किया जाएगा।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने अभियान के सफल संचालन के लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग और बेसिक शिक्षा विभाग आपसी समन्वय से प्रत्येक जिले में कार्ययोजना तैयार करेंगे। जिला प्रतिरक्षण अधिकारियों, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों और जिला विद्यालय निरीक्षकों के सहयोग से विद्यालयवार माइक्रोप्लान तैयार किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र बच्चा टीकाकरण से वंचित न रह जाए।
पहला चरण : डिप्थीरिया, टिटनेस और काली खांसी से बचाव
टीडी/टीडैप अभियान के तहत 5-6 वर्ष (कक्षा-1), 10 वर्ष (कक्षा-5) और 16 वर्ष (कक्षा-10 एवं 11) आयु वर्ग के बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार टीडी-10, टीडी-16 और टीडीैप-2 की बूस्टर डोज दी जाएगी।
प्रत्येक टीकाकरण सत्र में 50 से 75 बच्चों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान से पहले राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम, समन्वय बैठकें और विद्यालय स्तर की तैयारियां पूरी की जाएंगी।
दूसरा चरण : खसरा और रूबेला के खिलाफ विशेष अभियान
पहले चरण के बाद 18 से 28 अगस्त तक एमआर टीकाकरण अभियान संचालित किया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में 5 से 10 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को खसरा-रूबेला वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक दी जाएगी।
प्रत्येक विद्यालय को प्रतिदिन 100 से 125 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया है, जिससे खसरा और रूबेला जैसी बीमारियों से बच्चों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
दोनों अभियानों के लिए प्रत्येक विद्यालय में एक नोडल शिक्षक नियुक्त किया जाएगा। विद्यालयवार माइक्रोप्लान तैयार करने के साथ ही आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और शिक्षक मिलकर पात्र बच्चों की सूची तैयार करेंगे।
टीकाकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रार्थना सभा, अभिभावक-शिक्षक बैठकों और सामुदायिक संपर्क कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को अभियान का लाभ मिल सके।
अभियान की प्रगति की नियमित निगरानी राज्य और जिला स्तर पर की जाएगी। सभी गतिविधियों की जानकारी निर्धारित पोर्टल पर अपलोड की जाएगी और दैनिक समीक्षा के माध्यम से अभियान की गुणवत्ता, टीकाकरण कवरेज तथा छूटे हुए बच्चों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों को शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करना है, ताकि प्रत्येक पात्र बच्चे को समय पर बीमारियों से बचाव की सुरक्षा मिल सके।


