योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा और वैश्विक रोजगार अवसरों से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में योगी सरकार ने Tata Technologies और Deloitte के सहयोग से कौशल विकास को नई दिशा देने की योजना तैयार की है।
सोमवार को व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में दोनों कंपनियों ने युवाओं के लिए भविष्य की स्किल डेवलपमेंट रणनीति और रोजगार आधारित योजनाओं का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।
आईटीआई बनेंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
बैठक में टाटा टेक्नोलॉजीज ने प्रदेश के सरकारी आईटीआई संस्थानों को आधुनिक तकनीक से लैस कर ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने की योजना साझा की। इसके तहत छात्रों को ऑटोमेशन, इंडस्ट्री 4.0, ई-लर्निंग और एडवांस मशीनरी जैसी नई तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल डिग्रीधारी नहीं बल्कि इंडस्ट्री-रेडी प्रोफेशनल बनाना है, ताकि वे देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार हासिल कर सकें।
डेलॉयट तैयार करेगा भविष्य की स्किल रणनीति
डेलॉयट ने उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भविष्य के रोजगार रुझानों और उद्योगों की जरूरतों पर आधारित स्किल मॉडल पेश किया। कंपनी ने सुझाव दिया कि कौशल विकास योजनाओं को सीधे औद्योगिक निवेश और नई तकनीकों से जोड़ा जाए, जिससे रोजगार और स्वरोजगार दोनों के अवसर बढ़ सकें।
पीपीपी मॉडल पर जोर
बैठक में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के जरिए स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक कंपनियों की विशेषज्ञता का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश के युवाओं को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रदेश के युवाओं को नई तकनीकों में दक्ष बनाकर उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी स्किल कैपिटल बनाने में मदद मिलेगी।


