डिजिटल दौर में सोशल मीडिया युवाओं के लिए यात्रा और पर्यटन की नई प्रेरणा बन चुका है। इसी बदलते ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश पर्यटन ने प्रदेश के युवाओं को अपने शहर की संस्कृति, विरासत और खास पहचान का डिजिटल दूत बनाने की पहल की है।
‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान के तहत युवाओं को अधिकतम 60 सेकंड की रील के जरिए अपने शहर की कहानी दुनिया के सामने रखने का मौका मिलेगा। खास बात यह है कि कहानी किसी तय स्क्रिप्ट के आधार पर नहीं, बल्कि युवा अपने शब्दों, अपनी आवाज और अपने अंदाज में बताएंगे।
शहर की पहचान बताएंगी युवा रील्स
इस अभियान के जरिए प्रदेश के शहरों की उन कहानियों को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है, जो अक्सर पर्यटन की मुख्यधारा से दूर रह जाती हैं। शहर की ऐतिहासिक विरासत, स्थानीय खान-पान, पारंपरिक कला, त्योहार, हस्तशिल्प, पुराने मोहल्ले, लोक परंपराएं और कम चर्चित पर्यटन स्थल युवाओं की रील्स का हिस्सा बन सकते हैं।
युवा अपने कैमरे के सामने आकर अपने शहर से जुड़े अनुभव और उसकी खासियत साझा करेंगे। इसका उद्देश्य पर्यटन स्थलों को केवल तस्वीरों और सूचनाओं तक सीमित न रखकर स्थानीय लोगों की आवाज और अनुभव के जरिए उनकी वास्तविक कहानी दुनिया तक पहुंचाना है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
आज की जेन-जी यात्रा की योजना बनाने से पहले सोशल मीडिया पर छोटे वीडियो, स्थानीय लोगों के अनुभव और कंटेंट क्रिएटर्स की राय को तेजी से महत्व देती है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश पर्यटन ने पर्यटन प्रचार के लिए रील्स को माध्यम बनाया है।
रील्स के जरिए जहां लोकप्रिय पर्यटन स्थलों को नए अंदाज में प्रस्तुत किया जा सकेगा, वहीं कम चर्चित और अल्पज्ञात स्थलों को भी देश-दुनिया के दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
युवा बनेंगे अपने शहरों के सांस्कृतिक दूत
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान केवल उसके प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। प्रदेश के हर जिले, शहर और गांव की अपनी अलग कहानी और पहचान है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प, त्योहार, रीति-रिवाज और लोगों से जुड़ी कहानियां प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाती हैं। ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान के माध्यम से जेन-जी समेत प्रदेश के अन्य युवाओं को अपने शहरों का सांस्कृतिक दूत बनाने की पहल की जा रही है। युवा अपनी आवाज और अपने नजरिए से शहर की खासियत दुनिया के सामने रखेंगे, जिससे पर्यटकों को उत्तर प्रदेश को नए और अधिक रोचक तरीके से जानने का अवसर मिलेगा।
60 सेकंड में बतानी होगी अपने शहर की कहानी
अभियान में भाग लेना युवाओं के लिए आसान रखा गया है। प्रतिभागियों को अपने शहर की पहचान और उससे जुड़ी कहानी अधिकतम 60 सेकंड की रील में प्रस्तुत करनी होगी।
रील के लिए कुछ प्रमुख शर्तें भी रखी गई हैं:
- प्रतिभागी का स्वयं कैमरे के सामने होना अनिवार्य होगा।
- वीडियो में चेहरा स्पष्ट दिखाई देना चाहिए और आवाज साफ सुनाई देनी चाहिए।
- रील की शूटिंग खुले स्थान पर करनी होगी।
- बैकग्राउंड में शहर का कोई प्रमुख पर्यटन स्थल या पहचान से जुड़ा स्थान नजर आना चाहिए।
- रील हिंदी या अंग्रेजी, किसी भी भाषा में बनाई जा सकती है।
- वीडियो के अंत में ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ कहना अनिवार्य होगा।
प्रतिभागी अपनी प्रविष्टियां ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से भेज सकते हैं। अभियान से जुड़ी अधिक जानकारी और उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध संबंधित वीडियो भी देखे जा सकते हैं।
लखनऊ से ब्रज और बुंदेलखंड तक दिखेगी यूपी की विविधता
अभियान के तहत लखनऊ का कोई युवा शहर के खान-पान, चिकनकारी, पुराने मोहल्लों या ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्थलों की कहानी सुना सकता है। इसी तरह ब्रज, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और तराई क्षेत्र के युवा अपने-अपने इलाकों की परंपराओं, स्थानीय व्यंजनों, कला-संस्कृति और पर्यटन स्थलों को अपनी रील्स के जरिए दुनिया के सामने ला सकते हैं।
अपर मुख्य सचिव, पर्यटन अमृत अभिजात ने कहा कि महज 60 सेकंड की रील के जरिए किसी स्थान की विशेषता, स्थानीय अनुभव और व्यक्ति की अपनी आवाज को प्रभावी ढंग से एक साथ प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को नए नजरिए से देखने का अवसर मिलेगा और कम चर्चित स्थानों को भी व्यापक पहचान हासिल हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि युवाओं की ऐसी छोटी-छोटी कहानियां मिलकर उत्तर प्रदेश की आस्था, विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य, खान-पान और हस्तशिल्प की विविधता को देश-दुनिया के सामने एक समग्र यात्रा अनुभव के रूप में प्रस्तुत कर सकती हैं।
‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ का लक्ष्य साफ है—यूपी को सिर्फ पर्यटन स्थलों के जरिए नहीं, बल्कि उन शहरों में रहने वाले युवाओं की नजर और आवाज के जरिए दुनिया तक पहुंचाना।


