संभल हिंसा का ‘काला सच’! बृज लाल ने उठाए साजिश और राजनीतिक संरक्षण पर सवाल

shikha verma
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संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा को लेकर पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश एवं राज्यसभा सांसद बृज लाल ने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया है। अपने लेख में उन्होंने दावा किया कि सर्वे के दौरान हुई हिंसा के पीछे पहले से तैयार योजना थी और इसका उद्देश्य संभल में सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था।

बृज लाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुलिस और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के कारण स्थिति को बड़े पैमाने पर फैलने से रोका गया। उनके मुताबिक, घटना के बाद बड़ी संख्या में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ रही है।

संभल के इतिहास और धार्मिक स्थल का उल्लेख

अपने लेख में बृज लाल ने संभल के प्राचीन धार्मिक इतिहास का उल्लेख करते हुए हरिहर नाथ मंदिर से जुड़ी मान्यताओं का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि ऐतिहासिक काल में मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया और उसके अवशेषों से वर्तमान ढांचे का निर्माण किए जाने की बात कही जाती है।

उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश के तहत किए जा रहे सर्वे के दौरान इसी ऐतिहासिक विवाद को लेकर तनाव बढ़ा और बाद में हिंसा हुई। हालांकि, इस तरह के ऐतिहासिक दावों और घटनाक्रम की पुष्टि के लिए आधिकारिक ऐतिहासिक एवं न्यायिक रिकॉर्ड को आधार बनाया जाना आवश्यक है।

हिंसा में पुलिस पर हमले का आरोप

बृज लाल के अनुसार, सर्वे के दौरान भीड़ ने पुलिस और सर्वे टीम पर पथराव तथा गोलीबारी की। उन्होंने पुलिसकर्मियों के घायल होने का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन की मुस्तैदी से स्थिति को नियंत्रित किया गया।

उन्होंने दावा किया कि घटना के बाद 123 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और पुलिस द्वारा दाखिल आरोपपत्रों पर न्यायिक प्रक्रिया चल रही है। इन मामलों में अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी।

साजिश में नेताओं और अन्य लोगों की भूमिका का दावा

लेख में बृज लाल ने समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क सहित कई स्थानीय लोगों पर हिंसा की साजिश में भूमिका होने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बिजली चोरी के मामले का भी उल्लेख किया और बर्क के खिलाफ की गई कार्रवाई को कानून के समान अनुप्रयोग का उदाहरण बताया।

इसके अलावा उन्होंने सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल तथा कुछ अन्य स्थानीय लोगों के नाम भी लिए हैं। लेख में इन लोगों पर हिंसा की योजना में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों पर संबंधित व्यक्तियों का पक्ष और अदालत में मामले की स्थिति भी महत्वपूर्ण है।

बृज लाल ने हिंसा के कथित नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय अपराध से जोड़ते हुए दुबई में बैठे एक कथित अपराधी और चोरी की लग्जरी गाड़ियों के नेटवर्क का भी उल्लेख किया है। उन्होंने दावा किया कि इस अवैध गतिविधि से प्राप्त धन का इस्तेमाल हथियारों की तस्करी और हिंसा के लिए किया जाता था। इन दावों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों के आधिकारिक दस्तावेजों से होना आवश्यक है।

जांच आयोग की रिपोर्ट को लेकर दावा

बृज लाल ने बताया कि घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 28 नवंबर 2024 को एक उच्चस्तरीय जांच आयोग का गठन किया था। उनके अनुसार, आयोग में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के साथ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी ए.के. जैन शामिल थे।

उन्होंने दावा किया कि आयोग की रिपोर्ट में हिंसा के पीछे कुछ स्थानीय लोगों और राजनीतिक नेताओं की भूमिका का उल्लेख किया गया है। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर इस मामले में “तुष्टिकरण की राजनीति” करने का आरोप लगाया।

संभल की जनसांख्यिकी पर भी उठाए सवाल

लेख में संभल के सामाजिक और जनसांख्यिकीय बदलाव का भी उल्लेख किया गया है। बृज लाल ने दावा किया कि पिछले कई दशकों में हुए सांप्रदायिक दंगों और असुरक्षा के कारण हिंदू आबादी का एक हिस्सा क्षेत्र से पलायन करने के लिए मजबूर हुआ।

उन्होंने संभल में 1920 के दशक से अब तक कई बड़े दंगों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि लगातार हिंसा और राजनीतिक संरक्षण के कारण क्षेत्र की जनसांख्यिकी में बड़ा बदलाव आया है। आबादी से जुड़े इन आंकड़ों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक जनगणना के आंकड़ों से पुष्टि जरूरी है।

1978 के दंगों का भी किया जिक्र

बृज लाल ने 29 मार्च 1978 को संभल में हुए दंगों को अपने लेख का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उन्होंने दावा किया कि उस हिंसा में बड़ी संख्या में हिंदुओं की हत्या हुई और कई लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।

उन्होंने बनवारी लाल गोयल और लाला राम शरण रस्तोगी समेत कई लोगों की हत्या का उल्लेख करते हुए उस दौर की हिंसा को संभल के इतिहास का “काला अध्याय” बताया।

1993 में मुकदमों की वापसी पर सवाल

लेख में आरोप लगाया गया है कि दिसंबर 1993 में मुलायम सिंह यादव के दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद 1978 के दंगों से जुड़े कई मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हुई। बृज लाल ने इसे तत्कालीन सरकार की राजनीतिक नीति से जोड़ते हुए कहा कि मुकदमों की वापसी का असर लंबे समय तक संभल की सामाजिक स्थिति पर पड़ा।

इन आरोपों को लेकर संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, न्यायालय के आदेश और उस समय की आधिकारिक कार्रवाई का स्वतंत्र परीक्षण आवश्यक है।

“कानून से ऊपर कोई नहीं”: बृज लाल

बृज लाल ने अपने लेख के अंत में कहा कि मौजूदा उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। उनका कहना है कि संभल हिंसा के मामले में भी सरकार ने यह संदेश दिया है कि राजनीतिक प्रभाव रखने वाले लोगों को भी कानून के दायरे से बाहर नहीं रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि हिंसा के मामलों में अंतिम फैसला अदालत करेगी और दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।

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