सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अमित जोगी को 23 साल पुराने केस में मिली राहत

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने 2003 के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही इस मामले में सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह फैसला जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने सुनाया।

हाईकोर्ट के फैसले पर लगी रोक

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हाल ही में अमित जोगी को इस पुराने हत्याकांड में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।

क्या है मामला?

यह मामला 4 जून 2003 का है, जब छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल के दौरान रामावतार जग्गी की हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच राज्य पुलिस ने की थी, जिसे बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने अमित जोगी समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि, 2007 में निचली अदालत ने अधिकांश आरोपियों को दोषी ठहराया था, लेकिन अमित जोगी को उस समय बरी कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

अमित जोगी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और कपिल सिब्बल ने दलीलें पेश कीं, जबकि पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस राहत का विरोध किया। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे की सुनवाई तक सजा पर रोक लगाते हुए जांच एजेंसी से जवाब मांगा है।

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