हरियाणा सरकार ने बुधवार (8 अप्रैल) को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के दो वरिष्ठ अधिकारियों, राम कुमार सिंह और प्रदीप कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। दोनों अधिकारियों का सस्पेंशन राज्य की सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (SV & ACB) द्वारा की जा रही 590 करोड़ रुपये की IDFC फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि निलंबन के आदेश में सटीक कारण नहीं बताया गया, सूत्रों के अनुसार दोनों अधिकारियों की भूमिका इस मामले की जांच में सामने आई है।
सस्पेंड किए जाने से पहले राम कुमार सिंह राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष सचिव और पंचकुला महानगर विकास प्राधिकरण के एडिशनल सीईओ के पद पर तैनात थे। वहीं, प्रदीप कुमार राज्य परिवहन विभाग के निदेशक और परिवहन विभाग के विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थे। निलंबन के दौरान दोनों अधिकारी चंडीगढ़ में हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव (Services-I Branch) के कार्यालय में रिपोर्ट करेंगे और उन्हें अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के तहत निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा।
जानकारी के अनुसार, राम कुमार सिंह ने जुलाई 2025 से जनवरी 2026 तक पंचकुला नगर निगम के कमिश्नर के रूप में कार्य किया था, जबकि प्रदीप कुमार 31 अगस्त 2022 से 10 दिसंबर 2025 तक हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव थे।
SV & ACB की जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों ने सरकारी धन को अवैध रूप से कई बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए फर्जी कंपनियों का गठन किया था। निजी क्षेत्र के IDFC फर्स्ट बैंक में कुछ कर्मचारियों और अन्य लोगों द्वारा हरियाणा सरकार के खातों से 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ था। फरवरी में, हरियाणा सरकार ने इस बैंक को तत्काल प्रभाव से सरकारी कामकाज से हटा दिया था। इस मामले की जांच अब CBI के सुपुर्दगी में है और कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

