भोपाल: देश के टाइगर स्टेट कहे जाने वाले मध्य प्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने चिंता बढ़ा दी है। इस साल अब तक राज्य में 26 बाघों की मौत दर्ज की जा चुकी है, जिनमें से अधिकतर मामलों में बिजली करंट, संक्रमण और शिकार जैसी वजहें सामने आई हैं।
कान्हा टाइगर रिजर्व के सरही जोन में हाल ही में एक बाघिन के तीन शावकों की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट में फेफड़ों में संक्रमण को मौत का कारण बताया गया है, हालांकि संक्रमण कैसे फैला और समय पर इलाज क्यों नहीं हुआ, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
वन विभाग के अनुसार, मृत शावकों का पोस्टमार्टम कराया गया है और सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। एक अन्य शावक और बाघिन का इलाज जारी है।
लगातार बढ़ रही बाघों की मौतें
पिछले कुछ वर्षों में बाघों की मौत का आंकड़ा चिंताजनक रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले साल राज्य में लगभग 55 बाघों और 130 तेंदुओं की मौत हुई थी। इस साल भी स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में ही अप्रैल महीने में अब तक तीन बाघों की मौत दर्ज की जा चुकी है, जबकि पिछले आठ महीनों में 10 बाघ और 5 तेंदुओं की मौत हो चुकी है।
वन विभाग पर लापरवाही के आरोप
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने वन विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फील्ड स्टाफ की नियमित गश्त नहीं होती और निगरानी व्यवस्था कमजोर है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई इलाकों में अवैध गतिविधियां जैसे शिकार और खेती से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि टाइगर स्टेट में लगातार बाघों की मौत बेहद गंभीर विषय है और सरकार को निगरानी और संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।

