कानपुर बना यूपी का डिफेंस हब, हजारों करोड़ के निवेश से बढ़ेगा रक्षा उत्पादन

shikha verma
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उत्तर प्रदेश डिफेंस सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा रहा है। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत कानपुर में डिफेंस एम्युनिशन, छोटे हथियारों और आर्टिलरी सिस्टम से जुड़े उत्पादों का निर्माण बड़े पैमाने पर हो रहा है। निवेश, आधुनिक तकनीक और बढ़ती उत्पादन क्षमता के चलते कानपुर देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्रों में अपनी जगह मजबूत कर रहा है।

इसी कड़ी में अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की कानपुर स्थित एम्युनिशन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में विशेष दौरा आयोजित किया गया। इस दौरान कंपनी के सीईओ आशीष राजवंशी ने उत्पादन क्षमता और प्रस्तावित विस्तार योजनाओं की जानकारी दी।

250 एकड़ में होगा यूनिट का विस्तार

कानपुर के हाथीपुर क्षेत्र में करीब 250 एकड़ में यूनिट के विस्तार की योजना है। कंपनी के मुताबिक प्रस्तावित सुविधा पर करीब 2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कंपनी पहले ही कानपुर में लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निवेश कर चुकी है और आने वाले वर्षों में करीब 4,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त निवेश की योजना है।

इस विस्तार से उत्तर प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ-साथ डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में कानपुर की औद्योगिक भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है।

2,000 लोगों को मिल रहा रोजगार

फिलहाल कानपुर स्थित इस केंद्र में करीब 2,000 कुशल और अकुशल कर्मचारी कार्यरत हैं। प्रस्तावित विस्तार के बाद रोजगार के अवसर और बढ़ने की संभावना है। इसका असर मैन्युफैक्चरिंग के साथ लॉजिस्टिक्स और आसपास की अन्य गतिविधियों पर भी पड़ने की उम्मीद है।

सालाना 30 करोड़ राउंड तक बढ़ेगा उत्पादन

कानपुर की एम्युनिशन यूनिट में वर्तमान में करीब 15 करोड़ राउंड विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद का सालाना उत्पादन किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य साल के अंत तक इस क्षमता को बढ़ाकर करीब 30 करोड़ राउंड करने का है।

इस विस्तार का उद्देश्य देश की गोला-बारूद संबंधी जरूरतों को पूरा करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में उत्पादन क्षमता बढ़ाना है।

छोटे हथियारों से आर्टिलरी तक एम्युनिशन

यूनिट में अलग-अलग कैलिबर के एम्युनिशन का निर्माण और असेंबलिंग की जा रही है। इनमें राइफल और छोटे हथियारों के लिए स्मॉल-कैलिबर एम्युनिशन के साथ टैंक और आर्टिलरी सिस्टम में इस्तेमाल होने वाला लार्ज-कैलिबर एम्युनिशन शामिल है।

इसके अलावा मीडियम-कैलिबर एम्युनिशन के उत्पादन की भी तैयारी है, जिसका इस्तेमाल ऑटोकैनन और अन्य हथियार प्रणालियों में किया जाता है। कंपनी के मुताबिक इसका उत्पादन 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है।

2027 तक 40 लाख ग्रेनेड सालाना बनाने का लक्ष्य

कंपनी ने ग्रेनेड उत्पादन क्षमता बढ़ाने की भी योजना बताई है। इसके तहत 2027 तक सालाना 40 लाख ग्रेनेड बनाने की क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है। इसके बाद 2029 तक अतिरिक्त 40 लाख यूनिट की क्षमता बढ़ाने की योजना बताई गई है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद आत्मनिर्भरता पर जोर

अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने देश के लिए अपनी रक्षा उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करने की जरूरत को और स्पष्ट किया।

उनके मुताबिक युद्ध जैसी परिस्थितियों में दूसरे देशों से रक्षा सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में घरेलू स्तर पर पर्याप्त एम्युनिशन और हथियार प्रणालियों का उत्पादन भारत की रणनीतिक जरूरत है।

अभय राइफल से प्रहार एलएमजी तक

दौरे के दौरान कानपुर यूनिट में विकसित और निर्मित कई हथियार प्रणालियों को भी प्रदर्शित किया गया। अधिकारियों के मुताबिक अभय राइफल 5.56 एमएम और 9 एमएम, दोनों प्रकार के एम्युनिशन का इस्तेमाल करने में सक्षम है।

वहीं प्रहार लाइट मशीन गन (LMG) को लेकर भी कंपनी की ओर से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि भारतीय सेना की ओर से इस हथियार के लिए बड़ा ऑर्डर दिया गया है। इसके अलावा पिस्टल, आधुनिक राइफल और मशीन गन समेत अन्य हथियार प्रणालियां भी प्रदर्शित की गईं।

एआई से हो रही एम्युनिशन की जांच

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक एआई आधारित केस-लाइन इंस्पेक्शन तकनीक के जरिए एम्युनिशन केस की निर्धारित मानकों के आधार पर जांच की जाती है।

इस तकनीक से निरीक्षण प्रक्रिया को स्वचालित बनाने और उत्पादन की गुणवत्ता व सटीकता बनाए रखने में मदद मिलती है।

नाटो मानकों के अनुरूप उत्पादन

कंपनी के अधिकारियों के अनुसार यहां निर्मित एम्युनिशन और आर्टिलरी सिस्टम नाटो मानकों के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं। इससे विभिन्न हथियार प्रणालियों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और समान प्रदर्शन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

कंपनी का यह भी कहना है कि उसके एम्युनिशन की मांग मित्र देशों से भी आ रही है। ऐसे में कानपुर न केवल घरेलू रक्षा जरूरतों को पूरा करने में भूमिका निभा रहा है, बल्कि भारत के रक्षा विनिर्माण और संभावित निर्यात क्षमता को भी मजबूत कर रहा है।

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