नन्हे कंधे, लेकिन हौसला और आस्था बड़ों जैसी। महज छह साल की सगी बहनों महक और अनन्या ने अपने माता-पिता की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना को लेकर हरिद्वार से मेरठ तक कांवड़ यात्रा पूरी की। दोनों बहनें करीब एक सप्ताह तक पैदल चलकर 11 लीटर जल वाली कांवड़ लेकर सोमवार को मेरठ पहुंचीं।
रास्ते में जब लोगों की नजर इन नन्ही कांवड़ियों पर पड़ी तो हर कोई उनके साहस और श्रद्धा की सराहना करता नजर आया। कई जगह लोगों ने दोनों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें आशीर्वाद दिया। महक और अनन्या भी पूरे उत्साह के साथ ‘बोल बम’ के जयकारे लगाते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ती रहीं।
माता-पिता की लंबी उम्र के लिए उठाई कांवड़
महक और अनन्या ने बताया कि उन्होंने बाबा भोलेनाथ से अपने मम्मी-पापा की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की है। इसी मनोकामना को लेकर दोनों ने हरिद्वार से कांवड़ उठाने का संकल्प लिया।
कांवड़ का भार नन्हे कंधों पर था, लेकिन दोनों के चेहरे पर थकान से ज्यादा उत्साह दिखाई दिया। करीब एक सप्ताह की पैदल यात्रा के दौरान दोनों बहनों ने अपनी आस्था और संकल्प को बनाए रखा।
मेरठ पहुंचकर किया जलाभिषेक
हरिद्वार से शुरू हुई यात्रा सोमवार को मेरठ पहुंचकर पूरी हुई। इसके बाद मंगलवार को दोनों बहनों ने कांवड़ से लाए गए गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
जल चढ़ाते समय दोनों की सबसे बड़ी प्रार्थना अपने माता-पिता के लिए थी। उन्होंने भोलेनाथ से मम्मी-पापा को स्वस्थ रखने और उन्हें लंबी उम्र देने की कामना की।
आस्था के साथ माता-पिता के प्रति प्रेम की मिसाल
महक और अनन्या की यह कांवड़ यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि माता-पिता के प्रति उनके निश्छल प्रेम और समर्पण की भी मिसाल बन गई। नन्ही उम्र में कठिन पैदल यात्रा पूरी करने के उनके संकल्प ने रास्ते में मिलने वाले लोगों को भी प्रभावित किया।
दोनों बहनों की कांवड़ यात्रा की तस्वीरें और उनका उत्साह लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। नन्हे कंधों पर कांवड़ और दिल में माता-पिता के लिए दुआ लेकर निकली इन बहनों ने अपनी श्रद्धा से हर किसी का ध्यान खींच लिया।


