कैसे कांग्रेस के संकटमोचक बने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री?

shikha verma
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कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे डीके शिवकुमार को कांग्रेस का सबसे मजबूत संगठनकर्ता और संकटमोचक माना जाता है। उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए काम किया और कई राजनीतिक संकटों में कांग्रेस को संभाला। उनकी पहचान एक ऐसे नेता की है जो अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा देते हैं।

डीके शिवकुमार का राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा। 1999 में मंत्री बनने के लिए उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा से सीधे बातचीत की थी। बाद में उन्होंने विधानसभा में बताया कि उनके ज्योतिषी ने उन्हें सलाह दी थी कि “सत्ता छीननी पड़ती है।” यह घटना उनकी महत्वाकांक्षा और आत्मविश्वास को दिखाती है।

शिवकुमार ने राजनीति के साथ-साथ रियल एस्टेट, ग्रेनाइट और शिक्षा के क्षेत्र में भी निवेश किया और कर्नाटक के सबसे अमीर नेताओं में शामिल हो गए। कांग्रेस में उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती गई। 2003 में उन्होंने महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखने में मदद की, जबकि 2017 के गुजरात राज्यसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस विधायकों को संभालकर अहमद पटेल की जीत में अहम भूमिका निभाई।

हालांकि उनके करियर में मुश्किल दौर भी आए। आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद उन्हें 2019 में तिहाड़ जेल जाना पड़ा। इसी दौरान सोनिया गांधी उनसे मिलने पहुंचीं। बाद में उन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया।

2023 के विधानसभा चुनाव में डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया की जोड़ी ने कांग्रेस को सत्ता में वापसी दिलाई। अब कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उनकी निष्ठा, संगठन क्षमता और लंबे राजनीतिक संघर्ष का परिणाम है।

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