उत्तर प्रदेश के स्कूलों में छात्राओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण तैयार करने की दिशा में योगी सरकार ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं स्वच्छता को लेकर मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मासिक धर्म के कारण किसी छात्रा की पढ़ाई प्रभावित न हो और विद्यालयों में उन्हें जरूरी सुविधाएं, सही जानकारी और सहयोग मिल सके।
75 जिलों से 223 प्रतिभागी बनेंगे मास्टर ट्रेनर
राज्य स्तर पर आयोजित दो दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम में प्रत्येक जिले से तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
13 अगस्त को 37 जिलों के 111 प्रतिभागियों का प्रशिक्षण पूरा हुआ, जबकि 14 अगस्त को शेष 112 प्रतिभागियों का उन्मुखीकरण किया जाएगा। इस तरह दो दिनों में कुल 223 प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जा रहा है।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जिलों में सभी विद्यालयों के महिला और पुरुष शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देंगे।
स्कूलों में छात्राओं के लिए बेहतर सुविधाओं पर जोर
इस पहल के तहत मासिक धर्म स्वास्थ्य को सिर्फ सैनिटरी पैड की उपलब्धता तक सीमित नहीं रखा गया है। स्कूलों में अलग और स्वच्छ बालिका शौचालय, पानी, साबुन, सुरक्षित निस्तारण व्यवस्था और गोपनीयता जैसी सुविधाओं को भी जरूरी माना गया है।
आपात स्थिति में छात्राओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने और मासिक धर्म से जुड़े सवालों पर उन्हें सही एवं वैज्ञानिक जानकारी देने के लिए शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
‘पैड से आगे’ व्यापक व्यवस्था पर फोकस
प्रशिक्षण में शिक्षकों को बताया जा रहा है कि मासिक धर्म एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। इससे जुड़े मिथकों, झिझक और भेदभाव को दूर करने में विद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
शिक्षकों को छात्राओं के साथ संवेदनशील व्यवहार करने, उनकी निजता का सम्मान करने और जरूरत पड़ने पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी जाएगी।
सरकार का जोर ऐसी विद्यालयी व्यवस्था तैयार करने पर है, जहां छात्राएं बिना शर्म या भेदभाव के अपनी समस्याएं साझा कर सकें और मासिक धर्म के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की भावना को विद्यालयों तक पहुंचाने की तैयारी
यह पहल डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य मामले में 30 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़े व्यापक पहलुओं पर दिए गए निर्देशों की भावना को विद्यालय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में बताई जा रही है।
प्रशिक्षण में मासिक धर्म स्वास्थ्य को गरिमापूर्ण जीवन, समानता, स्वास्थ्य और शिक्षा के अधिकार से जोड़कर समझाया जा रहा है। साथ ही सरकारी और निजी, ग्रामीण और शहरी सभी विद्यालयों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
हर शिक्षक तक पहुंचेगा प्रशिक्षण
राज्य स्तर पर तैयार किए जा रहे मास्टर ट्रेनर अपने जिलों में जाकर सभी महिला और पुरुष शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देंगे। इससे राज्य स्तर पर तैयार प्रशिक्षण सामग्री और जानकारी को सीधे प्रत्येक विद्यालय तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
प्रशिक्षण के जरिए शिक्षकों को मासिक धर्म स्वास्थ्य, छात्राओं की गरिमा एवं गोपनीयता, स्वच्छता सुविधाओं और संवेदनशील व्यवहार से जुड़े जरूरी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।
जागरूकता से बदलेगा स्कूलों का माहौल
सरकार का मानना है कि सही जानकारी और संवेदनशील व्यवहार से छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ाया जा सकता है और मासिक धर्म से जुड़ी झिझक व भेदभाव को कम किया जा सकता है।
इस पहल के जरिए स्कूलों में ऐसा वातावरण तैयार करने पर जोर है, जहां स्वास्थ्य, गरिमा, समानता और शिक्षा को एक साथ महत्व मिले।
सरकार का फोकस
योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि विद्यालयों में मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करना है। मास्टर ट्रेनर राज्य स्तर की पहल को जिला और फिर विद्यालय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे।
सरकार के मुताबिक, लक्ष्य है कि प्रदेश के हर स्कूल में बेटियों को मासिक धर्म के दौरान जरूरी सुविधाएं, सही जानकारी और सम्मानजनक वातावरण मिल सके।


