मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती और सह-आरोपी रघुबीर शरण प्रजापति को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में धोखाधड़ी के मामले में तीन-तीन साल की कैद की सजा सुनाई है। भारती पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि प्रजापति पर कुल 2.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
अभियोजन के अनुसार, कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती ने ट्रस्ट के नाम पर बैंक में जमा राशि का समय बढ़ाने के लिए फर्जीवाड़ा किया और इस प्रक्रिया में अनुचित ब्याज का लाभ उठाया। 24 अगस्त 1998 को उनकी मां सावित्री श्याम ने ट्रस्ट के नाम पर 13.5% वार्षिक दर से तीन वर्षीय एफडी में 10 लाख रुपये जमा किए थे। इसके बाद, 1999 से 2011 तक लगभग 18.5 लाख रुपये का अवैध ब्याज निकाला गया, जो एफडी की शर्तों का उल्लंघन था।
कोर्ट का फैसला
विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) दिग विनय सिंह ने दोनों आरोपियों को धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों का उपयोग और आपराधिक साजिश रचने का दोषी ठहराया।
- प्रजापति को तीन अलग-अलग धाराओं में दोषी करार दिया गया, कुल 2.5 लाख रुपये का जुर्माना और अलग-अलग सजा सुनाई गई।
- राजेंद्र भारती को IPC की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत दोषी पाया गया।
विधायक की सदस्यता समाप्त
दिल्ली की विशेष अदालत द्वारा 2 अप्रैल 2026 को सजा सुनाए जाने के बाद, मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने राजेंद्र भारती की सीट रिक्त घोषित कर दी। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) के तहत, दो वर्ष या उससे अधिक की सजा पाए किसी विधायक की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है।
कांग्रेस कानूनी मोर्चे पर सक्रिय
कांग्रेस पार्टी ने अब कानूनी मोर्चे पर सक्रियता दिखाई है। वरिष्ठ नेता और अधिवक्ता कपिल सिब्बल एवं विवेक तंखा हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं। बचाव पक्ष का मुख्य उद्देश्य सजा पर स्थगन पाना है, जिससे भारती की सदस्यता बहाल होने की संभावना बनी रहे।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, दतिया जैसी महत्वपूर्ण सीट का खोना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका हो सकता है। राजेंद्र भारती की सदस्यता जाने से पार्टी के भीतर और बाहर राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना है।

