यूपी में एनकाउंटर पर फिर छिड़ी बहस, आंकड़ों को लेकर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

shikha verma
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उत्तर प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। गाजीपुर में विनीत राय हत्याकांड के आरोपी कमलेश के एनकाउंटर के बाद विपक्षी दल सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि राज्य सरकार इसे अपराध और माफिया के खिलाफ अपनी “जीरो टॉलरेंस” नीति का हिस्सा बता रही है।

गाजीपुर मुठभेड़ के बाद मृतक आरोपी के परिजनों और विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। इसी बीच योगी सरकार के कार्यकाल में हुए एनकाउंटरों से जुड़े आंकड़े भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।

योगी सरकार में हुए प्रमुख एनकाउंटर

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस ने कई हाई-प्रोफाइल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे, अतीक अहमद के बेटे असद अहमद, अनिल दुजाना और अन्य कुख्यात अपराधियों के एनकाउंटर प्रमुख रहे हैं।

अपराध के आंकड़ों में गिरावट का दावा

सरकारी आंकड़ों और उपलब्ध अपराध रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2017 की तुलना में कई गंभीर अपराधों में कमी दर्ज की गई है। हत्या, अपहरण, फिरौती, बलात्कार, चोरी और डकैती जैसे मामलों में गिरावट को सरकार अपनी कानून-व्यवस्था की नीतियों का परिणाम बता रही है।

एनकाउंटर के आंकड़ों पर चर्चा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2017 से सितंबर 2024 के बीच कुल 207 अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए। इनमें विभिन्न जातीय और धार्मिक समुदायों से जुड़े आरोपी शामिल थे। विपक्ष इन आंकड़ों की व्याख्या सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कार्रवाई केवल अपराधियों के खिलाफ की गई है और इसमें किसी जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया गया।

सबसे अधिक कार्रवाई वाले जोन

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मेरठ, आगरा और वाराणसी जोन में सबसे अधिक पुलिस मुठभेड़ दर्ज की गई हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अपराधियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई का दावा किया गया है।

सरकार का पक्ष

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करते रहे हैं। सरकार का कहना है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, संगठित अपराध पर नियंत्रण और माफिया नेटवर्क को खत्म करने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। बुलडोजर कार्रवाई, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और पुलिस अभियानों को इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। फिलहाल एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है और यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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