मशहूर गायिका आशा भोसले ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में न सिर्फ अपने संघर्षों के बारे में खुलकर बात की थी, बल्कि लता मंगेशकर के साथ प्रतिस्पर्धा और अपने पसंदीदा गायकों को लेकर भी दिलचस्प बातें साझा की थीं।
करीब 65 साल लंबे अपने करियर की शुरुआत 1943 में करने वाली आशा भोसले ने बताया था कि उनकी ऊर्जा और मुस्कान का कोई खास राज नहीं है—बल्कि यह उनकी इच्छाशक्ति और जीवन के संघर्षों से मिली ताकत का नतीजा है। बचपन में ही पिता के निधन के बाद उन्होंने कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था और जिम्मेदारियों ने ही उन्हें मजबूत बनाया।
उन्होंने स्वीकार किया कि उनके दौर में लता मंगेशकर और गीता दत्त जैसी बड़ी गायिकाओं के बीच जगह बनाना आसान नहीं था। “तगड़ी प्रतिस्पर्धा थी, बहुत मेहनत करनी पड़ी,” उन्होंने कहा।
हालांकि, उन्होंने कभी इस प्रतिस्पर्धा को नकारात्मक रूप में नहीं देखा। अपने पसंदीदा गायकों के बारे में बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा पसंद लता मंगेशकर ही हैं। दोनों बहनों के रिश्ते को लेकर उन्होंने कहा कि वे लंबे समय तक एक ही घर में साथ रहीं और उनके बीच गहरा पारिवारिक और भावनात्मक जुड़ाव है।
वहीं पुरुष गायकों में उनका पसंदीदा नाम किशोर कुमार था। उन्होंने कहा कि किशोर कुमार दिल और दिमाग से गाते थे और उनकी गायकी ईश्वर की देन थी।
अपने करियर के बारे में आशा भोसले ने यह भी कहा कि उनकी सफलता किसी एक संगीतकार की देन नहीं थी, बल्कि ओ. पी. नैयर, आर. डी. बर्मन, मदन मोहन और कई अन्य संगीतकारों का अहम योगदान रहा।
उन्होंने यह भी बताया कि वे हर गाने के साथ अपनी आवाज़ और अंदाज़ बदलती थीं ताकि वह परदे पर दिखने वाले किरदार के साथ मेल खा सके—चाहे वह हेलेन हों या मधुबाला।
संगीत को लेकर उनका नजरिया बेहद गहरा था। उनका कहना था, “संगीत मेरे लिए सांस लेने जैसा है। जब तक आवाज़ है, मैं गाती रहूंगी।”
अपने जीवन के उतार-चढ़ावों के बावजूद, आशा भोसले ने हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा। उनका मानना था कि बुरे दिन भी गुजर जाते हैं और अच्छे दिन जरूर आते हैं।
उन्होंने अंत में यही इच्छा जताई थी कि लोग उन्हें सिर्फ एक महान गायिका ही नहीं, बल्कि एक अच्छे इंसान के रूप में याद रखें।

