पाकिस्तान सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट में 17.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। नए बजट के तहत रक्षा क्षेत्र के लिए तीन ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (करीब 10.8 अरब डॉलर) आवंटित किए गए हैं।
नेशनल असेंबली में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब ने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और राष्ट्रीय रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए रक्षा बजट बढ़ाना आवश्यक था। उन्होंने भारत के साथ हालिया तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान की सेना ने अपनी तैयारी और क्षमता का प्रदर्शन किया है।
बजट दस्तावेजों के अनुसार रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा सैन्य कर्मियों के वेतन, भत्तों और अन्य प्रशासनिक खर्चों पर खर्च होगा। वहीं हथियारों, सैन्य उपकरणों और गोला-बारूद की खरीद के लिए आवंटन में सबसे अधिक वृद्धि की गई है। इस मद में पिछले वर्ष की तुलना में 39 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी की गई है।
पाकिस्तान का कुल बजट 64.71 अरब डॉलर का है, जिसमें रक्षा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 16.7 प्रतिशत है। हालांकि सैन्य पेंशन को रक्षा बजट में शामिल नहीं किया गया है। रिटायर्ड सैनिकों की पेंशन के लिए अलग से 2.95 अरब डॉलर का प्रावधान रखा गया है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के साथ तनाव, अफगानिस्तान सीमा पर सुरक्षा चुनौतियां और बदलते वैश्विक सैन्य परिदृश्य पाकिस्तान को रक्षा खर्च बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक युद्ध में ड्रोन, साइबर तकनीक, मिसाइल और उन्नत हथियार प्रणालियों की बढ़ती भूमिका के कारण सैन्य आधुनिकीकरण जरूरी हो गया है।
हालांकि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था और बढ़ते कर्ज के बीच रक्षा खर्च में लगातार वृद्धि चिंता का विषय है। उनका तर्क है कि जीडीपी के अनुपात में रक्षा खर्च भले कम हो रहा हो, लेकिन कर राजस्व के मुकाबले यह अब भी काफी अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां और पड़ोसी देशों के साथ तनावपूर्ण संबंध बने रहेंगे, तब तक रक्षा बजट में बढ़ोतरी की प्रवृत्ति जारी रह सकती है।


