छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट 23 अप्रैल को सुनवाई करेगा। इस मामले ने एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिली। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उन्हें बिना पूरी तरह सुने ही, सीबीआई की दलीलों पर मात्र कुछ ही समय में फैसला सुना दिया, जिससे उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
यह मामला वर्ष 2003 का है, जब एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की बिलासपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे राज्य में राजनीतिक भूचाल ला दिया था। मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई थी, जिसने अमित जोगी को कथित रूप से मास्टरमाइंड बताते हुए चार्जशीट दाखिल की थी।
वर्ष 2007 में विशेष सीबीआई अदालत ने कई आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी, जबकि अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। बाद में इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसके बाद मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को पुनर्विचार के लिए भेजा गया।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया और उन्हें आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए अब अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई को इस लंबे समय से चले आ रहे केस में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

