समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा।
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, “एक प्रधान को हटाकर आपने एक प्रधान को बचा लिया।” उन्होंने यह टिप्पणी एक मंत्री के पद से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करते हुए की।
पेपर लीक को लेकर सरकार पर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने कहा कि युवाओं के आंदोलन को वह लंबे समय से देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब जनता और युवा अपनी मांगों को लेकर मजबूती से खड़े होते हैं तो सरकार को भी झुकना पड़ता है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश समेत देश में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक के मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए। अखिलेश ने दावा किया कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में कई भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं सामने आई हैं और करीब 20 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं।
सपा प्रमुख ने कहा कि युवाओं का आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें अभिभावक भी बड़ी संख्या में जुड़े। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन युवाओं के भविष्य और रोजगार से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।
किसानों के आंदोलन का किया जिक्र
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में किसानों के आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब किसानों का आंदोलन तेज हुआ और चुनाव नजदीक आए तो सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े। उन्होंने कहा कि जनता की एकजुटता से सरकार को फैसले बदलने पड़ते हैं।
परीक्षा व्यवस्था और आउटसोर्सिंग पर उठाए सवाल
सपा अध्यक्ष ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और सरकारी व्यवस्थाओं में आउटसोर्सिंग को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर परीक्षा संचालन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी में भी बाहरी एजेंसियों की भूमिका बढ़ रही है तो जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था कमजोर हुई है। अखिलेश यादव ने कहा कि युवाओं को भरोसेमंद और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की जरूरत है, ताकि उन्हें अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना न करना पड़े। लोकसभा में अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।


