कांवड़ियों की सेवा में बदला अंदाज, हाईटेक रसोई से हर दिन हजारों रोटियां

shikha verma
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श्रावण मास की कांवड़ यात्रा में इस बार सेवा, स्वच्छता और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। कांवड़ मार्ग पर लगाए गए शिविरों में शिवभक्तों के स्वागत और सेवा के लिए ऐसी भव्य व्यवस्थाएं की गई हैं, जो किसी बड़े विवाह समारोह से कम नजर नहीं आतीं। सात्विक परंपरा का पालन करते हुए श्रद्धालुओं को बिना प्याज-लहसुन के पारंपरिक भारतीय व्यंजनों के साथ पास्ता, पिज्जा, नूडल्स, मोमोज और मंचूरियन जैसे आधुनिक व्यंजन भी परोसे जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप प्रशासनिक अधिकारी भी निजी कांवड़ शिविरों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, पेयजल और अन्य व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है।

सुबह से रात तक स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था

कांवड़ियों के लिए पूरे दिन का भोजन समय के अनुसार निर्धारित किया गया है। सुबह की शुरुआत चाय, बिस्किट, पोहा और जलेबी से होती है। नाश्ते में समोसा, कचौड़ी, ब्रेड पकौड़ा, वेज हक्का नूडल्स और हनी चिली पोटैटो जैसे व्यंजन परोसे जा रहे हैं।

दोपहर के भोजन में शाही पनीर, कढ़ाई पनीर, पनीर लबाबदार, दाल मखनी, मिक्स वेज, चूरचूर नान, बटर नान, जीरा राइस और ताजी रोटियों की व्यवस्था है। भोजन के बाद रबड़ी-जलेबी, रसमलाई, रसगुल्ला और गुलाब जामुन जैसी मिठाइयां भी श्रद्धालुओं को परोसी जा रही हैं।

शाम के समय स्प्रिंग रोल, चिली पनीर, मंचूरियन, व्हाइट और रेड सॉस पास्ता, वेज पिज्जा, मोमोज, मैकरोनी, सूप और बर्गर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं रात के भोजन में छोले-पूड़ी, मटर पनीर, पुलाव, दाल और ताजी रोटियों के साथ खीर, हलवा, फ्रूट कस्टर्ड और गुलाब जामुन की व्यवस्था की गई है। लस्सी, छाछ, जूस, चाय, कॉफी और शीतल पेयजल भी श्रद्धालुओं को लगातार उपलब्ध कराया जा रहा है।

हाईटेक रसोई ने बढ़ाई सेवा की रफ्तार

कंकरखेड़ा व्यापार संघ के शिविर में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल सेवा को तेज और व्यवस्थित बनाने के लिए किया जा रहा है। शिविर के संयोजक नीरज मित्तल और व्यवस्था संचालक राजेश खन्ना के मुताबिक यहां एक साथ 20 किलो आटा गूंधने वाली मशीन के साथ ऑटोमैटिक रोटी मशीन लगाई गई है।

ऑटोमैटिक मशीन एक मिनट में करीब 16 और एक घंटे में लगभग 900 रोटियां तैयार कर रही है। प्रतिदिन करीब छह से सात हजार रोटियां तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा सब्जियां काटने और मसाले तैयार करने के लिए भी आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे कम समय में बड़ी संख्या में कांवड़ियों के लिए भोजन तैयार करना संभव हो रहा है।

व्रत रखने वाले कांवड़ियों के लिए अलग फलाहार

मोदीपुरम स्थित शिविर में उपवास रखने वाले कांवड़ियों के लिए विशेष फलाहार की व्यवस्था की गई है। शिविर संचालक दल के सदस्य सुधीर रस्तोगी के अनुसार व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन, आलू की सब्जी, मौसमी फल और अन्य व्रताहार उपलब्ध कराया जा रहा है।

लंबी यात्रा के बाद श्रद्धालुओं के लिए कुल्हड़ में केसरयुक्त गर्म दूध की भी व्यवस्था की गई है। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य कांवड़ियों को राहत देने के साथ उनकी ऊर्जा बनाए रखना है।

ईको-फ्रेंडली भंडारों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कांवड़ यात्रा के दौरान इस बार कई शिविरों में पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया है। अनेक भंडारों को प्लास्टिक मुक्त रखा गया है। भोजन परोसने के लिए प्लास्टिक और थर्माकोल की प्लेटों के बजाय स्टेनलेस स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

स्वच्छ सर्विंग स्टेशन, व्यवस्थित भोजन व्यवस्था और साफ-सुथरा वातावरण शिविरों की खास पहचान बन रहे हैं। सेवा के साथ पर्यावरण संरक्षण का यह प्रयास कांवड़ यात्रा में स्वच्छता का सकारात्मक संदेश भी दे रहा है।

सेवा को मान रहे सबसे बड़ी साधना

मां कांवड़ सेवा शिविर के संचालक अमित मूर्ति का कहना है कि शिवभक्तों को केवल भोजन उपलब्ध कराना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनकी यात्रा को सुरक्षित, सुविधाजनक और यादगार बनाना भी सेवा का हिस्सा है।

शिविर संचालकों के मुताबिक योगी सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा के मानकों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। प्रशासनिक टीमें भी समय-समय पर शिविरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रही हैं।

कांवड़ मार्ग पर सैकड़ों स्वयंसेवक दिन-रात सेवा में जुटे हैं। कहीं भोजन परोसा जा रहा है तो कहीं विश्राम और पेयजल की व्यवस्था संभाली जा रही है। सेवा, स्वच्छता, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के इस मेल ने कांवड़ शिविरों को श्रद्धालुओं के लिए महज पड़ाव नहीं, बल्कि अपनत्व और सेवा के केंद्र में बदल दिया है। यही ‘अतिथि देवो भव’ की भावना को वास्तविक रूप में साकार करता नजर आ रहा है।

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