पश्चिम बंगाल में स्ट्रॉन्ग रूम पर बवाल, TMC-BJP आमने-सामने

shikha verma
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पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग के बाद स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान समाप्त होने के बाद ईवीएम और पोस्टल बैलेट की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे।

30 अप्रैल को कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम स्थित स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि बिना पार्टी प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बैलेट बॉक्स और दस्तावेज़ों को संभाला जा रहा था, जिसे उन्होंने लोकतंत्र के खिलाफ बताया।

टीएमसी नेता कुणाल घोष और शशि पांजा ने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरना दिया और अंदर जाने की अनुमति मांगी। बाद में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee भी मौके पर पहुंचीं और उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने के निर्देश दिए।

वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि टीएमसी हार के डर से भ्रम फैला रही है। बीजेपी नेताओं का दावा है कि स्ट्रॉन्ग रूम पूरी तरह सुरक्षित हैं और सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार हो रही हैं।

मामले पर सफाई देते हुए चुनाव अधिकारियों ने कहा कि सभी स्ट्रॉन्ग रूम सुरक्षित हैं और वहां की निगरानी सीसीटीवी के जरिए की जा रही है। उनके अनुसार पोस्टल बैलेट से जुड़ी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत और सभी को सूचित करके ही की गई थी।

गौरतलब है कि स्ट्रॉन्ग रूम वह सुरक्षित स्थान होता है, जहां मतदान के बाद ईवीएम और अन्य चुनावी सामग्री को कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है। यहां तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और लगातार निगरानी सुनिश्चित की जाती है।

पश्चिम बंगाल में चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

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