प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार जल गुणवत्ता की नियमित जांच और निगरानी व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही है। इसी क्रम में बिहार सरकार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) की तीन सदस्यीय टीम ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) की लखनऊ स्थित राज्य स्तरीय जल विश्लेषण प्रयोगशाला का एक्सपोजर विजिट किया।
इस दौरान यूनिसेफ उत्तर प्रदेश की टीम भी मौजूद रही। बिहार की टीम ने उत्तर प्रदेश में जल गुणवत्ता की जांच, निगरानी, प्रयोगशाला प्रबंधन और आधुनिक परीक्षण तकनीकों की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अध्ययन किया।
गांव स्तर तक जल गुणवत्ता की निगरानी
एक्सपोजर विजिट के दौरान राज्य प्रयोगशाला प्रभारी एवं सहायक शोध अधिकारी अनिल कुमार ने टीम को जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में संचालित जल गुणवत्ता निगरानी एवं अनुश्रवण व्यवस्था की जानकारी दी।
बिहार की टीम को प्रदेश के प्रयोगशाला नेटवर्क, ग्राम स्तर पर फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के माध्यम से पानी की जांच और पोर्टल के जरिए इसकी निगरानी की पूरी प्रक्रिया समझाई गई। अधिकारियों ने बताया कि पानी में किसी भी प्रकार का संदूषण पाए जाने पर सुधारात्मक कार्रवाई, पुनः जांच और समस्या के स्थायी समाधान तक एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम किया जाता है।
इस दौरान एनएबीएल एक्रीडेशन और प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
अत्याधुनिक तकनीकों से पानी की जांच
बिहार की टीम ने राज्य स्तरीय प्रयोगशाला में ई-कोलाई और टोटल कोलीफॉर्म जैसे जीवाणुजनित मापदंडों की जांच की प्रक्रिया का अवलोकन किया। इसके अलावा पानी में बेहद कम मात्रा में मौजूद भारी धातुओं की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाली आईसीपी-एमएस तकनीक और कीटनाशक अवशेषों की जांच के लिए जीसी-एमएस/एमएस जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी भी दी गई।
टीम को भविष्य में पानी में मौजूद नए और उभरते प्रदूषकों की जांच के लिए विकसित की जा रही सुविधाओं, जिनमें पीएफएएस और माइक्रोप्लास्टिक जैसे प्रदूषक शामिल हैं, के बारे में भी जानकारी दी गई।
यूपी और बिहार के बीच तकनीकी अनुभवों का आदान-प्रदान
उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के संयुक्त निदेशक, सीपी यूनिट इंजीनियर संजय गुप्ता की अध्यक्षता में यूपी, बिहार और यूनिसेफ के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक भी आयोजित हुई।


