यूपी की कानून-व्यवस्था पर ‘योगी पथ : बेमिसाल’ परिचर्चा, जीरो टॉलरेंस नीति पर हुई चर्चा

shikha verma
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उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर ‘योगी पथ : बेमिसाल’ परिचर्चा श्रृंखला के तहत शुक्रवार को ‘उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था’ विषय पर ऑनलाइन चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रदेश सरकार की अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति, पुलिस की सक्रियता और प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की।

परिचर्चा का संयोजन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली की प्रोफेसर पूनम कुमारी ने किया। उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी सूर्य कुमार शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड प्रतिमा लकड़ा ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर कानून और न्याय व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर विचार रखे। वहीं, कमर्शियल टेक्निकल कंसल्टेंसी एलएलपी, मुंबई के प्रबंध निदेशक सौरभ कुमार अखौरी ने भी परिचर्चा में हिस्सा लिया।

कानून-व्यवस्था और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर चर्चा

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने उत्तर प्रदेश में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की नीतियों पर अपने विचार साझा किए। चर्चा में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई, पुलिस की सक्रियता और प्रशासनिक स्तर पर त्वरित निर्णयों को कानून-व्यवस्था में बदलाव से जोड़कर देखा गया।

वक्ताओं ने सरकार की ‘अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस’ नीति को विशेष रूप से रेखांकित किया। उनका कहना था कि कानून का प्रभावी अनुपालन और अपराध के खिलाफ कार्रवाई सुशासन के लिए महत्वपूर्ण है।

पूर्व डीजीपी ने पुलिस की भूमिका और प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर दिया जोर

पूर्व डीजीपी सूर्य कुमार शुक्ल ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की भूमिका और प्रशासनिक इच्छाशक्ति को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक दबाव होने का दावा किया और मौजूदा सरकार के कार्यकाल में कानून के प्रभावी अनुपालन पर अपने विचार रखे।

उन्होंने माफिया के खिलाफ कार्रवाई और ऑपरेशन रोमियो का भी उल्लेख किया। साथ ही, उन्होंने ODOP और MSME जैसी योजनाओं के जरिए कानून-व्यवस्था और सुशासन के आर्थिक प्रभावों को समझाने का प्रयास किया।

अपने प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए पूर्व डीजीपी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की भी सराहना की।

महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर भी हुई चर्चा

सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड प्रतिमा लकड़ा ने कानून और न्याय व्यवस्था के नजरिए से प्रदेश में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने गुड गवर्नेंस, कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के बीच संबंध को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने में प्रभावी कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था की अहम भूमिका होती है।

पांच प्रमुख स्तंभों पर सौरभ अखौरी ने रखे विचार

सौरभ कुमार अखौरी ने अपने वक्तव्य में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को पांच प्रमुख बिंदुओं के आधार पर प्रस्तुत किया। इनमें आंकड़ों की स्थिति, माफिया के खिलाफ कार्रवाई, ऑपरेशन कन्विक्शन, महिला सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति, पुलिस बल का पुनर्निर्माण और तकनीकी बदलाव शामिल रहे।

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