दिल्ली गैंगरेप केस पर चंद्रशेखर आजाद ने सरकार को घेरा, बोले- निर्भया कांड के बाद भी बेटियां सुरक्षित नहीं

shikha verma
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 दिल्ली में चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय किशोरी के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना को लेकर नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने घटना को बेहद शर्मनाक और भयावह बताते हुए सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह घटना निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों और सरकारी निगरानी व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि यदि इतने वर्षों बाद भी बेटियां सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षित नहीं हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होनी चाहिए।

बस की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

नगीना सांसद ने दावा किया कि घटना ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट की ओर जा रही स्लीपर बस में हुई। उन्होंने कहा कि बस की खिड़कियों पर लगे गहरे पर्दों के कारण अंदर की गतिविधियां बाहर से दिखाई नहीं दे रही थीं।

उन्होंने यात्री बसों में सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल उठाते हुए कहा कि व्यावसायिक वाहनों में लाइव व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) और पैनिक बटन जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं अनिवार्य हैं और इन्हें संबंधित कंट्रोल रूम से जोड़ा जाना चाहिए। चंद्रशेखर आजाद ने सवाल किया कि यदि बस में ये व्यवस्थाएं मौजूद थीं, तो घटना के दौरान कोई अलर्ट क्यों नहीं मिला।

लंबी दूरी की बसों में CCTV की मांग

चंद्रशेखर आजाद ने लंबी दूरी की स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे जैसी निगरानी व्यवस्था को जरूरी बताया। उन्होंने बसों में चालक और परिचालक के पुलिस सत्यापन तथा यूनिफॉर्म पर नेमप्लेट जैसी व्यवस्थाओं के पालन पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि करीब 47 किलोमीटर की यात्रा के दौरान बस की प्रभावी निगरानी और जांच क्यों नहीं हुई, इसकी जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि बस में CCTV और अन्य निर्धारित सुरक्षा उपकरण मौजूद थे या नहीं और यदि थे तो उन्होंने काम क्यों नहीं किया।

निर्भया कांड के बाद बने नियमों पर सवाल

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा को लेकर कई नियम और व्यवस्थाएं लागू की गई थीं। इसके बावजूद सार्वजनिक परिवहन में ऐसी घटना सामने आना सरकारी निगरानी और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा नियम केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे और सार्वजनिक परिवहन में बेटियां सुरक्षित नहीं होंगी, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

चंद्रशेखर आजाद ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हुई इस वारदात ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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